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हिमालय बचा तो बचेगी जीवनधारा, 11 लाख पौधे लगाएंगे अनुयायी

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हिमालय बचा तो बचेगी जीवनधारा, 11 लाख पौधे लगाएंगे अनुयायी


हरिद्वार, 09 सितंबर (हि.स.)। हिमालय दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। नेपाल में हाल में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनियोजित विकास और प्रकृति में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप आपदाओं का खतरा बढ़ा रहा है।

मिश्रीमठ में साधकों के साथ पौधारोपण करते हुए महामंडलेश्वर ने प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से जुड़े देश-विदेश के साधकों को हिमालय संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलाई और प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हिमालय केवल बर्फ और पत्थरों का समूह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। हिमालय सुरक्षित रहेगा तो नदियां सुरक्षित रहेंगी और नदियों से खेत, जंगल तथा मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। हिमालय संरक्षण किसी एक संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

महामंडलेश्वर ने कहा कि जंगलों की कटाई और जलस्रोतों का अनियंत्रित दोहन पर्यावरणीय संकट को और गहरा कर रहा है। सनातन संस्कृति में प्रकृति को पूजनीय माना गया है, इसलिए प्रकृति की रक्षा करना हमारा सांस्कृतिक और नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने लोगों से जन्मदिन और धार्मिक आयोजनों जैसे अवसरों पर पौधारोपण करने की अपील की।

डॉ. उमेश सचान ने बताया कि करौली शंकर धाम के अनुयायियों की ओर से देशभर में 11 लाख पौधे लगाए जाएंगे। पौधों के संरक्षण और देखभाल के लिए ‘पौधा एंबुलेंस’ भी चलाई जाएगी। कार्यक्रम में अनिरुद्ध भाटी, नितिन दास, मनीष कुमार समेत सैकड़ों अनुयायी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला