हर्बल खेती से रुकेगा पलायन,मजबूत होगी पहाड़ के गांवों की अर्थव्यवस्था
-हर्बल कुंभ उत्तराखंड की समृद्धि और पलायन रोकने में बनेगा सहायक : आचार्य बालकृष्ण
पौड़ी में हर्बल कुंभ के दूसरे दिन कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर, 2030 तक सेब उत्पादन में हिमाचल-जम्मू-कश्मीर के समकक्ष पहुंचने का लक्ष्य
पौड़ी गढ़वाल, 05 नवंबर (हि.स.)। उत्तराखंड में पलायन की चुनौती से निपटने और पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए पारंपरिक खेती के साथ जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार उत्तराखंड को हर्बल स्टेट के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
प्रथम हर्बल कुंभ एवं द्वितीय धन्वंतरि महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को मालागांव में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी और ग्रामीण विकास एवं एमएसएमई मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि औषधीय खेती, कृषि आधारित उद्यम और स्वरोजगार पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड जड़ी-बूटियों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। आयुर्वेद की परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में आचार्य बालकृष्ण का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती, इसलिए स्वरोजगार के अवसर विकसित करना जरूरी है। इस दिशा में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका अहम है। हर्बल खेती को गांवों की अर्थव्यवस्था से जोड़कर ग्रामीणों की आय बढ़ाई जा सकती है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य के गांवों से लोगों का पलायन एक बड़ी चुनौती है। औषधीय पौधों की खेती और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने किसानों से मिलेट्स और औषधीय फसलों की खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने लक्ष्य जताया कि वर्ष 2030 तक उत्तराखंड सेब उत्पादन के मामले में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के समकक्ष पहुंच सकता है।
कोरोना काल का अनुभव साझा करते हुए जोशी ने आयुर्वेदिक काढ़े से राहत मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने इस परिसर का कायाकल्प किया है।
इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हर्बल कुंभ अपने उद्देश्यों में सफल रहा है। कृषि, किसान, कुटीर उद्योग और स्वरोजगार इस आयोजन के प्रमुख केंद्र में हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन उत्तराखंड की समृद्धि में योगदान देने के साथ पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे कृषि आधारित नवाचार का विश्वस्तरीय केंद्र बनाने की परिकल्पना भी रखी।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में पतंजलि ने योग और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है। श्री धन्वंतरि धाम का निर्माण प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना उसकी सुंदरता और दिव्यता को निखारने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यह धाम दुनिया को जोड़ने का माध्यम बनेगा।
बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने दुर्गम क्षेत्र में इस परिसर को विकसित कर उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में धन्वंतरि धाम आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वेदप्रिया आर्य ने किया। इस दौरान अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

