हलाला के विरुद्ध पहला केस दर्ज कराने वाली पीड़िता से मिलीं अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष
हरिद्वार, 15 मई (हि.स.)। उत्तराखंड के हरिद्वार में यूसीसी के तहत हलाला के खिलाफ दर्ज हुआ पहला मुकदमा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते रोज ही पुलिस ने इस मामले में काेर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। पीड़िता का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार काे उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयाेग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने पीड़िता एवं उसके परिजनों से भेंट की और उसकी स्थिति की जानकारी ली। उपाध्यक्ष ने पीड़िता काे हरसंभव सहयोग एवं न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
इस माैके पर राज्य अल्पसंख्यक आयाेग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का आधार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकारों में निहित होता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू किए जाने का निर्णय ऐतिहासिक एवं दूरगामी प्रभाव वाला है, जिससे महिलाओं को सामाजिक कुरीतियों और भेदभावपूर्ण प्रथाओं से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हलाला एवं तीन तलाक जैसी कुप्रथाएं न केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन करती हैं, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाती हैं। ऐसे में इन कुप्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पीड़िता के साहस एवं जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा और उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की ताकत देगा।
उपाध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार एवं अल्पसंख्यक आयोग पीड़िता के साथ मजबूती से खड़े हैं और मामले में निष्पक्ष एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित कराने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं को कानूनी संरक्षण मिलेगा और समाज में समानता एवं न्याय की भावना को बल मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

