सेब-कीवी की हाई डेंसिटी खेती को बढ़ावा देगी उत्तराखंड सरकार
देहरादून, 11 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में सेब और कीवी की हाई डेंसिटी खेती को बढ़ावा देने के साथ फलोत्पादन का क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट समेत अन्य फलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए क्लस्टर आधारित खेती, आधुनिक नर्सरियों और बेहतर भंडारण के साथ ही फलोत्पादन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने की दिशा में जोर दिया जा रहा है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में फलोत्पादन से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के लिए जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। उन्होंने जिलों में वर्तमान में उगाई जा रही फसलों और उनके उत्पादन की स्थिति की जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को किसानों से नियमित फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं और सुझावों को योजनाओं में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं में सुधार की आवश्यकता होने पर जिलाधिकारी लिखित सुझाव उपलब्ध करा सकते हैं, ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने मिशन की निर्धारित अवधि के लिए प्रत्येक जिले में फलोत्पादन क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने के लक्ष्य तय करने और इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की विशेषज्ञता और संसाधनों का अधिक उपयोग करने पर जोर दिया।
बर्द्धन ने कहा कि प्रदेश में फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन के साथ-साथ इससे जुड़ा पूरा इकोसिस्टम विकसित करना जरूरी है। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज चेन, परिवहन, रोपवे, विपणन और प्रसंस्करण इकाइयों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को इन क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं को योजनाओं में शामिल करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। सेब और कीवी की सघन खेती के लिए नई एवं गुणवत्तापूर्ण किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ किसानों से फीडबैक लेने और उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल करने पर भी जोर दिया।
मुख्य सचिव ने जनपद विशेष योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए नए क्षेत्रों को फलोत्पादन से जोड़ने और उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने के निर्देश दिए। इसके लिए हाई डेंसिटी किस्मों की अत्याधुनिक नर्सरियां विकसित करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस स्थापना के लिए प्रत्येक जिले में तीन-तीन वेंडर्स को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए प्रभावी हैंड होल्डिंग करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कम उत्पादकता वाले पुराने फलोद्यान क्षेत्रों को हाई डेंसिटी की नई फसलों से बदलने और नए विकसित क्षेत्रों में फल उत्पादन शुरू होने तक इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि किसानों को संक्रमण अवधि के दौरान आय का नुकसान न हो।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, एस.एन. पांडेय और राजेंद्र कुमार, गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप, कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी और उद्यान निदेशक आर.के. सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

