home page

विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा पर दें विशेष ध्यान : राज्यपाल

 | 
विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा पर दें विशेष ध्यान : राज्यपाल


देहरादून, 13 अगस्त (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने निजी विश्वविद्यालयों से शोध, नवाचार और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री देना नहीं बल्कि उन्हें रोजगार, उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाना होना चाहिए।

राज्यपाल ने गुरुवार को लोक भवन में उत्तराखंड के स्व वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ दूसरे चरण की बैठक की। बैठक में 14 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रतिभाग किया। कुलपतियों ने अपने संस्थानों की उपलब्धियों, भावी योजनाओं और चुनौतियों की जानकारी साझा की।

बैठक में अनुसंधान को बढ़ावा देने, पेटेंट संस्कृति विकसित करने, पेटेंट के व्यावसायीकरण, उद्योग-अकादमिक सहयोग, साझा शोध व्यवस्था और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाने पर चर्चा हुई।

राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने विश्वविद्यालयों से युवाओं को नशे जैसी चुनौतियों से दूर रखने के साथ सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देने को कहा। इसके साथ ही नैतिक मूल्यों, संस्कार, परंपराओं और चरित्र निर्माण को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की आवश्यकता जताई।

राज्यपाल ने कहा कि 21 वीं सदी में शिक्षा के सामने पर्यावरण संरक्षण के साथ मेटावर्स, सेमीकंडक्टर, स्पेस, साइबर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने की चुनौती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को इन क्षेत्रों में अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा देने की सलाह दी।

उन्होंने रिसर्च, पब्लिकेशन और साइटेशन पर विशेष ध्यान देने के साथ पेटेंट को केवल दर्ज कराने तक सीमित न रखने और उनके व्यावसायीकरण की दिशा में काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि शोध का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह समाज, उद्योग और प्रदेश के विकास में उपयोगी साबित हो।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को उत्तराखंड की आवश्यकताओं और स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप शोध के विषय चिन्हित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की समस्याओं और विकास की संभावनाओं से जुड़े शोध विषय प्रदेश के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालयों को अपनी पहचान और विरासत के संरक्षण पर भी ध्यान देने को कहा। इसके लिए संस्थापक और विश्वविद्यालय के इतिहास पर पुस्तक प्रकाशित करने, संस्थान की यात्रा पर फिल्म बनाने और कॉफी टेबल बुक तैयार करने का सुझाव दिया।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय आपसी सहयोग और समन्वय से मजबूत अकादमिक एवं शोध इकोसिस्टम विकसित करें। विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उनका लाभ विद्यार्थियों के साथ समाज, उद्योग और प्रदेश के विकास तक पहुंचे।

बैठक में राज्यपाल के विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल,सचिव उच्च शिक्षा डॉ.बीवीआरसी पुरुषोत्तम, अपर सचिव राज्यपाल रीना जोशी सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय