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पांच साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला : राज्यपाल

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पांच साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला : राज्यपाल


देहरादून, 15 सितंबर (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड में पांच वर्ष उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक यात्राओं में से एक है। सेना में चार दशक की सेवा के दौरान किसी एक स्थान पर तीन वर्ष से अधिक रहने का अवसर नहीं मिला, लेकिन देवभूमि में पांच वर्ष कैसे बीत गए, इसका पता ही नहीं चला। उन्होंने कहा कि यह केवल उनके कार्यकाल की उपलब्धियों का अवसर नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का क्षण है, जिन्होंने एक परिवार, एक टीम और एकजुट होकर इस यात्रा को आगे बढ़ाया।

राज्यपाल के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि उनके लिए यह बेहद आत्मीय और भावुक क्षण है। उन्होंने लोक भवन परिवार, विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों, युवाओं, महिलाओं और प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता ने इस यात्रा को सार्थक बनाया है।

पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोक भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यहां कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति ने अपने दायित्व को पूरी निष्ठा और आत्मीयता से निभाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की सफलता उसके प्रत्येक सदस्य के योगदान से होती है। सम्मानित कार्मिकों का उत्साह बढ़ाते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे लोक भवन परिवार की मेहनत का सम्मान है।

राज्यपाल ने इस अवसर पर लोक भवन सूचना परिसर द्वारा प्रकाशित ‘आत्मा के स्वर-05’ का विमोचन किया। इस पुस्तक में राज्यपाल के विभिन्न अवसरों एवं कार्यक्रमों के दौरान दिए गए भाषणों का संकलन है। वहीं कार्यक्रम में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों, पहली ‘21वीं सदीः चुनौतियां और अवसर’, दूसरी ‘विकसित भारत/2047-आत्मनिर्भर समावेशी और सतत राष्ट्र निर्माण के बढ़ते कदम’ तथा तीसरी ‘विकसित उत्तराखण्डः राज्यपाल के पंच स्वप्न और संदृष्टि’ का विमोचन किया।

इस अवसर पर श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ऐप ‘गढ़ संवाद’ का भी लोकार्पण किया गया। ‘गढ़ संवाद’ गढ़वाली भाषा के लिए एआई आधारित डिजिटल भाषा संवाद मंच है। इसका उद्देश्य केवल भाषा को अनुवाद करना नहीं, बल्कि गढ़वाली भाषा को डिजिटल दुनिया से जोड़ना और स्थानीय बोली, संस्कृति एवं लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

कार्यक्रम में सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन ने स्वागत संबोधन दिया और राज्यपाल के मार्गदर्शन हेतु उनका लोक भवन की ओर से आभार व्यक्त किया। राज्यपाल के पांच वर्षों के कार्यकाल और उनकी विभिन्न पहलों पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया।

इससे पूर्व में राज्यपाल ने लोक भवन के मुख्य प्रवेश द्वार-3 का लोकार्पण किया। उत्तराखण्ड की पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला पर आधारित यह भव्य प्रवेश द्वार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थापत्य परंपरा को दर्शाता है। इसकी भव्यता और आकर्षण लोक भवन की गरिमा को भी बढ़ाते हैं। राज्यपाल ने प्रवेश द्वार के निर्माण कार्य से जुड़े लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों, कार्मिकों एवं श्रमिकों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित समय में इस भव्य एवं आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाना सराहनीय है। उन्होंने निर्माण कार्य में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रयासों की प्रशंसा की।

इस अवसर पर प्रथम महिला गुरमीत कौर, सचिव श्री राज्यपाल रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, अपर सचिव रीना जोशी, वित्त नियंत्रक डॉ तृप्ति श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ नितिन उपाध्याय, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल