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सरस्वती ताल और केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल रवाना

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सरस्वती ताल और केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल रवाना


देहरादून, 08 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित जोखिम को कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से चमोली स्थित सरस्वती ताल और उत्तरकाशी स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हुआ। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने अभियान के लिए विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसके तहत झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार प्रणालियों समेत आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षात्मक और जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर काम किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था और स्थानीय चेतावनी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से चार का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि शेष का चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसी क्रम में सरस्वती ताल और केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि करीब 5,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सरस्वती ताल और करीब 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारताल का सर्वेक्षण कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान दोनों झीलों की स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

अभियान में यूएसडीएमए, उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (यूएलएमएमसी), बाबा साहेब पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी से ग्लेशियर झीलों और उनके संभावित प्रभावों का बहुआयामी वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय