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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की प्रायोजक संस्था पर नया कानूनी विवाद, पंजाब सभा पहुंची सिविल कोर्ट

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हरिद्वार, 03 अगस्त (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी (सम) विश्वविद्यालय की प्रायोजक संस्था को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। पंजाब सभा की ओर से हरिद्वार सिविल कोर्ट में दीवानी वाद दायर कर दिल्ली सभा और हरियाणा सभा के विश्वविद्यालय की प्रायोजक संस्था होने के दावे को चुनौती दी गई है।

वाद में पंजाब सभा का कहना है कि दिल्ली सभा और हरियाणा सभा, पंजाब सभा का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए इन दोनों संस्थाओं का गुरुकुल कांगड़ी (सम) विश्वविद्यालय की प्रायोजक संस्था के रूप में कोई वैधानिक अधिकार या संबंध नहीं है। याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि इन संस्थाओं को विश्वविद्यालय की प्रायोजक संस्था के रूप में प्रस्तुत या प्रचारित किए जाने पर रोक लगाने संबंधी उचित आदेश पारित किए जाएं।

वाद एडवोकेट अश्विनी शर्मा ने पंजाब सभा के अध्यक्ष के रूप में दायर किया है। याचिका में दावा किया गया है कि सार्वदेशिक सभा ने उन्हें ही पंजाब सभा का विधिवत अध्यक्ष स्वीकार किया है। वहीं, याचिका में यह भी कहा गया है कि सुदर्शन शर्मा को पंजाब सभा के अध्यक्ष के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

पंजाब सभा का कहना है कि प्रायोजक संस्था को लेकर लंबे समय से बनी अस्पष्टता के कारण विश्वविद्यालय के प्रशासन, नीतिगत निर्णयों और प्रबंधन संबंधी मामलों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती रही है। ऐसे में इस विवाद का न्यायिक समाधान आवश्यक है, ताकि भविष्य में प्रशासनिक और कानूनी स्पष्टता बनी रहे

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है और इसकी स्थापना आर्य समाज के आदर्शों पर हुई थी। विश्वविद्यालय के संचालन और प्रायोजक संस्था को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में इस मामले का निर्णय विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की व्यवस्थाओं पर प्रभाव डाल सकता है। माना जा रहा है कि इस मामले का फैसला लंबे समय से चले आ रहे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला