गढ़भोज हमारी संस्कृति, परंपरा और स्वास्थ्य का संगम: डॉ पुरी
हरिद्वार, 07 अक्टूबर (हि.स.)। एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज में बुधवार को उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय अनाजों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त डॉ. रविन्द्र पुरी मुख्य अतिथि रहे। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री और वरिष्ठ पत्रकार संदीप रावत सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मंडुवा, झंगोरा, भट्ट, गहत सहित स्थानीय अनाजों और दालों से तैयार पारंपरिक व्यंजनों की आकर्षक प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों ने व्यंजनों के निर्माण, उनके स्थानीय महत्व और पौष्टिक गुणों की जानकारी भी दी।
मुख्य अतिथि महन्त डॉ. रविन्द्र पुरी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान प्राकृतिक सौंदर्य के साथ उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक खान-पान से भी है। स्थानीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पूर्वजों ने ऐसी खाद्य परंपरा विकसित की, जो पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक है।
गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और जीवन-पद्धति का प्रतिबिंब है। युवाओं को आधुनिक जीवनशैली के साथ अपनी पारंपरिक विरासत से भी जुड़ना चाहिए। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पूर्व कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में भोजन को स्वस्थ जीवन और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्य पदार्थों में पीढ़ियों से अर्जित स्थानीय ज्ञान-विज्ञान और अनुभव समाहित है। मंडुवा, झंगोरा, भट्ट और गहत जैसी फसलें कृषि एवं खाद्य परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
इनके संरक्षण का अर्थ स्थानीय ज्ञान, कृषि व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को बचाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से लोकपरंपराओं का अध्ययन कर उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का आह्वान किया।
प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि गढ़भोज केवल पारंपरिक भोजन का उत्सव नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति, कृषि, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को जोड़ने वाला अभियान है। महाविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक दायित्वों से जोड़ा जाए।
सोनाली, वंशिका और माही प्रथम
गढ़भोज प्रतियोगिता में बीएससी की छात्रा सोनाली, वंशिका और माही को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार मिला। संगीता भट्ट, मीनाक्षी, शिल्पी, अंकिता, दिव्यांशी और प्रिया को संयुक्त रूप से द्वितीय तथा कशिश रावत, नेहा जोशी और स्वीटी रानी को संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार दिया गया। बीए की छात्रा खुशी, रिमझिम, नीशू तथा बीकॉम की आस्था और आयुषी को सांत्वना पुरस्कार मिला।
इस अवसर पर डॉ. शिवकुमार चौहान, डॉ. मनोज कुमार सोही, डॉ. मोना शर्मा, डॉ. लता शर्मा, वैभव बत्रा, डॉ. विजय शर्मा, डॉ. हरीश जोशी, कार्यालय अधीक्षक मोहन चन्द्र पाण्डेय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

