गंगाबंदी होते ही जलविहिन हुई हरकी पैड़ी, हरिद्वार की रौनक गायब
हरिद्वार, 21 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से गंगनहर को 20 दिन के लिए बंद किए जाने का असर धर्मनगरी हरिद्वार में साफ नजर आने लगा है।
गंगनहर में जल प्रवाह रुकने से विश्व प्रसिद्ध हरकी पैड़ी भी जलविहीन नजर आ रही है। गंगा की कलकल धारा के बिना हरकी पैड़ी का नजारा बदला हुआ है। घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं को जल न होने से मायूस होना पड़ रहा है। गंगा में स्नान और आचमन के लिए जल नहीं मिलने से कई श्रद्धालु मायूस होकर लौट रहे हैं। वहीं, गंगाबंदी के कारण जहां धर्मनगरी की रौनक फीकी पड़ गई है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह रोजगार तलाशने का अवसर भी बन गया है।
दशहरे की रात से गंगनहर में पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर जल बंद हो गया है। गंगनहर की सफाई और मरम्मत के लिए प्रतिवर्ष निर्धारित अवधि में यह बंदी की जाती है। इस दौरान नहर से जुड़ी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ ही आवश्यक मरम्मत कार्य किए जाते हैं। इस बार भी गंगनहर बंद होने से हरिद्वार के प्रमुख गंगा घाटों पर इसका असर दिखाई देने लगा है।
छोटी दिवाली तक गंगनहर बंद रहने की बात कही जा रही है। हालांकि, दीपावली से पहले गंगा में जल छोड़ने की तैयारी है। आरती के समय हरकी पैड़ी पर करीब तीन फीट पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
गंगा की धारा थमते ही सिक्के और कीमती सामान तलाशने वालों की भीड़
गंगनहर में पानी का प्रवाह बंद होते ही हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों और नहर में सिक्के व अन्य सामान तलाशने वालों की भीड़ भी जुटने लगी है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद लोग नदी के तल में उतरकर सिक्के और श्रद्धालुओं की ओर से प्रवाहित की गई अन्य वस्तुओं को तलाशते नजर आए।
रात के समय गंगा बंदी के बाद टॉर्च की रोशनी में लोग सामान ढूढ़ने गंगा में उतर पड़े। गंगा की धारा थमते ही ऐसे लोगों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। उनके लिए गंगाबंदी के ये दिन कुछ अतिरिक्त कमाई का जरिया बन जाते हैं।
बंगाली सीजन में श्रद्धालुओं को उठानी पड़ रही परेशानी
गंगाबंदी का असर ऐसे समय में दिखाई दे रहा है, जब हरिद्वार में बंगाली श्रद्धालुओं का सीजन भी चलता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान, धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ के लिए धर्मनगरी पहुंचते हैं। हरकी पैड़ी पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंगा स्नान की इच्छा लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को घाटों पर अपेक्षित जल उपलब्ध नहीं है।
गंगाबंदी का व्यापारी और गंगा सभा करते रहे हैं विरोध
हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी को लेकर स्थानीय व्यापारी और गंगा सभा पूर्व में भी विरोध जताते रहे हैं। उनका कहना है कि गंगाबंदी के दौरान हरकी पैड़ी पर जल की कमी होने से श्रद्धालुओं को असुविधा होती है। धार्मिक गतिविधियों के साथ ही पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर भी इसका असर पड़ता है। विशेष रूप से श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले दिनों में गंगा का जलस्तर कम होने से धर्मनगरी की रौनक प्रभावित होती है।
व्यापारियों और गंगा सभा की ओर से मांग की जाती रही है कि गंगनहर की सफाई और मरम्मत का काम इस तरह कराया जाए, जिससे व्यापार प्रभावित न हो और हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रहे।
दीपावली से पहले जल छोड़ने की तैयारी
गंगनहर बंद होने के बाद सिंचाई विभाग की ओर से सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। निर्धारित अवधि में कार्य पूरा होने के बाद दीपावली से पहले गंगा में पानी छोड़े जाने की तैयारी है। आरती के समय हरकी पैड़ी पर करीब तीन फीट जल उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है।
फिलहाल गंगा की लहरों और घाटों की चहल-पहल के लिए पहचाने जाने वाले हरिद्वार में जल प्रवाह रुकने से एक अलग ही तस्वीर दिखाई दे रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

