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परमार्थ निकेतन की गंगा जागरूकता कार्यशाला संपन्न, पुरोहितों ने लिया स्वच्छ गंगा का संकल्प

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परमार्थ निकेतन की गंगा जागरूकता कार्यशाला संपन्न, पुरोहितों ने लिया स्वच्छ गंगा का संकल्प


ऋषिकेश, 31 जुलाई (हि. स.)। परमार्थ निकेतन में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत आयोजित 14 वीं गंगा जागरूकता एवं गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए पुरोहितों, आचार्यों और गंगा सेवकों ने के सान्निध्य में स्वच्छ एवं अविरल गंगा के संरक्षण का संकल्प लिया।

समापन समारोह में स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवनदर्शन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि गंगा आरती तभी सार्थक है, जब गंगा प्रदूषण मुक्त हो। उन्होंने पुरोहितों से प्रत्येक धार्मिक आयोजन को पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त घाट, जल संरक्षण और जनजागरण से जोड़ने का आह्वान किया।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को गंगा आरती की पारंपरिक विधि, वैदिक मंत्रोच्चार, घाट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, जल गुणवत्ता, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और 'अर्थ गंगा' की अवधारणा पर प्रशिक्षण दिया गया। समापन पर सभी प्रतिभागियों ने परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर आयोजित गंगा आरती में सहभागिता कर अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता और गंगा संरक्षण का अभियान चलाने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर उनके बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्रसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का संकल्प भी लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय