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टिहरी में स्टाम्प शुल्क चोरी के चार मामलों में 1.89 करोड़ रुपये का जुर्माना

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-सात मंजिला भवन को खाली भूमि दिखाकर कराया था पंजीकरण

नई टिहरी, 03 जुलाई (हि.स.)। टिहरी गढ़वाल के अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र नेगी की अदालत ने शुक्रवार को स्टाम्प शुल्क की अपवंचना (चोरी) से जुड़े चार मामलों का निस्तारण करते हुए संबंधित पक्षों पर कुल एक करोड़ 89 लाख 99 हजार 840 रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने पाया कि विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर स्टाम्प शुल्क की चोरी की गई थी।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि टिहरी गढ़वाल के तपोवन गांव स्थित संबंधित भूमि को विक्रय विलेख में खाली भूमि दर्शाकर पंजीकृत कराया गया था। हालांकि स्थानीय निरीक्षण में उक्त भूमि पर सात मंजिला फ्लैट निर्मित पाए गए। न्यायालय ने इसे भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 47-ए के तहत स्टाम्प शुल्क की चोरी माना।

अपर जिलाधिकारी की अदालत ने चारों मामलों में देय स्टाम्प शुल्क के साथ विक्रय विलेख के निष्पादन की तिथि से निर्णय की तिथि तक प्रतिमाह 1.5 प्रतिशत की दर से अधिभार भी लगाया। इसके अलावा प्रत्येक मामले में 47 लाख 49 हजार 960 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

ये चारों मामले अंकित भाटिया, नितेश कुमार, पंकज शर्मा तथा नितेश कुमार से संबंधित हैं। जांच में पाया गया कि विक्रय विलेख के पंजीकरण के दौरान भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर स्टाम्प शुल्क का भुगतान कम किया गया था।

न्यायालय ने चारों मामलों में कुल मिलाकर एक करोड़ 89 लाख 99 हजार 840 रुपये का जुर्माना लगाया। प्रशासन का कहना है कि स्टाम्प शुल्क की चोरी और राजस्व हानि से जुड़े मामलों में आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल