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गड्ढे में फंसे घायल हाथी को वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाया

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गड्ढे में फंसे घायल हाथी को वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाया


देहरादून, 31 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड के पीपल पड़ाव वन क्षेत्र में गहरे गड्ढे में फंसे करीब आठ वर्षीय जंगली हाथी को वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने उपचार के बाद सुरक्षित उसके झुंड से मिला दिया। हाथी को गड्ढे से बाहर निकालने के बाद वह खुद खड़ा नहीं हो पा रहा था। पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लगातार उपचार एवं प्रयासों के बाद वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में सफल रहा।

वन विभाग के अनुसार, हाथी 25 अक्टूबर की रात करीब एक मीटर गहरे गड्ढे में फंस गया था। उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन वह स्वयं खड़ा होने में असमर्थ था। वन विभाग की पशु चिकित्सा टीम ने तत्काल उसका उपचार शुरू किया और उसकी स्थिति पर निगरानी रखी। बाद में उपचार में सहयोग के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों को भी बुलाया गया।

जांच में हाथी की पीठ के ऊपरी हिस्से में सूजन पाई गई। एक्स-रे में कोमल ऊतकों में चोट की आशंका जताई गई। हाथी अपने चारों पैरों को हिला पा रहा था, लेकिन अगले पैरों पर शरीर का भार नहीं संभाल पा रहा था।

वन विभाग के पशु चिकित्सकों के साथ वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने उसे तरल पदार्थ दिए और लेजर थेरेपी, दर्द प्रबंधन तथा घाव की ड्रेसिंग सहित आवश्यक उपचार किया। जेसीबी और स्लिंग की मदद से उसे खड़ा करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन शुरुआती कोशिश सफल नहीं हुई।

लगातार उपचार और निगरानी के बाद हाथी की स्थिति में सुधार हुआ। उसने करीब आठ से 10 किलोग्राम हरा चारा और 15 से 20 लीटर पानी का सेवन किया। इसके बाद जेसीबी और स्लिंग की मदद से किए गए प्रयास के दौरान वह बिना सहारे के खड़ा हो गया। हालांकि, उसके दाहिने अगले पैर में सूजन और लंगड़ाहट थी, जिसके लिए उपचार जारी रखा गया। बाद में हाथी अपने झुंड की ओर चला गया और उससे मिल गया।

वन विभाग के डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने कहा कि गड्ढे से बाहर निकालने के बाद हाथी का खड़ा नहीं हो पाना चिंता का विषय था। वन विभाग की पशु चिकित्सा टीम ने लगातार उसकी देखभाल की और वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों की मदद से उपचार को आगे बढ़ाया। हाथी को दोबारा खड़ा होकर अपने झुंड से मिलते देखना राहत और खुशी का विषय है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक बैजू राज एमवी ने कहा कि गड्ढे से बाहर निकालने के बावजूद हाथी का खड़ा नहीं हो पाना चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। वन विभाग के पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर उसकी गतिशीलता बहाल करने के लिए उपचार किया गया। उन्होंने कहा कि हाथी का स्वयं खड़ा होना और झुंड से मिलना अभियान का सुखद परिणाम रहा।

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने भी संयुक्त बचाव अभियान को वन्यजीव संरक्षण में आपसी सहयोग का उदाहरण बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय