उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, 2026-27 के लिए टैरिफ में कोई बढ़ोतरी नहीं
देहरादून, 31 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों पर बड़ा फैसला लेते हुए टैरिफ में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी को मंजूरी नहीं दी है। आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से प्रस्तावित 17 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि को खारिज कर मौजूदा दरों को यथावत रखा है।
उक्त जानकारी मंगलवार को विद्युत नियामक भवन में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा एवं सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी ने पत्रकारों को दी। उन्हाेंने बताया कि विदयुत वितरण कंपनियों, यूपीसीएल, यूजेवीएन लि.,पिटकुल एवं एसएलडीसी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत वितरण,उत्पादन एवं पारेषण से संबंधित टैरिफ आदेशों के प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने बताया कि यूपीसीएल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक राजस्व आवश्यकता लगभग 14,731.98 करोड़ रुपये आंकी थी, जबकि आयोग ने इसे घटाकर 12,489.54 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। मौजूदा टैरिफ पर अनुमानित राजस्व 12,590.41 करोड़ रुपये रहने से करीब 100.87 करोड़ रुपये का अधिशेष भी सामने आया है।
प्रस्तावित बढ़ोतरी के संबंध में आयोग ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना आवश्यक नहीं है। हालांकि, टैरिफ संरचना को संतुलित करने के लिए कुछ श्रेणियों में आंशिक संशोधन किए गए हैं। सभी उपभोक्ता श्रेणियों के लिए फिक्स्ड, डिमांड चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया। क्रॉस-सब्सिडी को राष्ट्रीय टैरिफ नीति के अनुसार प्लसधाइनस 20 फीसदी के भीतर रखा गया है। उन्हाेंने बताया कि सोलर ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 0.39 रुपये प्रति यूनिट का ‘ग्रीन टैरिफ’ स्वीकृत किया गया। इसके अलावा डिजिटल भुगतान पर 1.5 फीसदी और अन्य माध्यमों से भुगतान पर 1 फीसदी की छूट जारी रहेगी और प्रीपेड मीटर अपनाने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा शुल्क में 3 से 4 प्रतिशत तक छूट मिलेगी।
औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए प्रावधान
आयोग ने उच्च वोल्टेज उपभोक्ताओं के लिए लोड फैक्टर स्लैब में बदलाव करते हुए 50 फीसदी से अधिक लोड फैक्टर पर टैरिफ में कमी का प्रावधान किया है, जिससे उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। आयोग ने यूपीसीएल को स्मार्ट मीटरिंग योजना समयबद्ध तरीके से लागू करने, उच्च लाइन लॉस वाले फीडरों की निगरानी और सुधार के लिए स्थायी समिति गठित करने तथा परिचालन दक्षता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आयोग के इस निर्णय से घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है। प्रस्तावित भारी वृद्धि को खारिज करते हुए दरों को स्थिर रखना राज्य में उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने वाला कदम माना जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

