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शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण का संगम बना 'प्रोत्साहन' समारोह

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शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण का संगम बना 'प्रोत्साहन' समारोह


हरिद्वार, 11 अप्रैल (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का 123वां वार्षिकोत्सव 'प्रोत्साहन' शनिवार को 21 कुण्डीय वैदिक यज्ञ के साथ प्रारम्भ हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण का संगम देखने को मिला।

मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी ने प्राचीन भारतीय परंपराओं को संजोते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहनचन्द्र जोशी ने कहा कि यह संस्थान स्वामी दयानन्द सरस्वती और स्वामी श्रद्धानन्द के सपनों को साकार कर रहा है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के माध्यम से विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का आश्वासन भी दिया।

नगर मेयर किरण जैसल ने छात्रों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से ही भारत पुनः विश्व गुरु बन सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रहा है तथा शीघ्र ही वोकेशनल ट्रेनिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला