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विलुप्त होती दून बासमती की खुशबू लौटने लगी, 160 किसान 75 हेक्टेयर में कर रहे खेती

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विलुप्त होती दून बासमती की खुशबू लौटने लगी, 160 किसान 75 हेक्टेयर में कर रहे खेती


देहरादून, 26 जुलाई (हि.स.)। देश-विदेश में अपनी विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध देहरादून की पारंपरिक दून बासमती के पुनर्जीवन की पहल को गति मिली है। वर्ष 2025 के सफल ट्रायल के बाद इस वर्ष जिले के 160 किसानों ने 75 हेक्टेयर क्षेत्र में 2.2 दून बासमती की रोपाई शुरू की है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान के संयुक्त प्रयासों से इस पारंपरिक धान की खेती को दोबारा बढ़ावा दिया जा रहा है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि सहसपुर और विकासनगर के साथ अब रायपुर और डोईवाला के किसान भी दून बासमती की खेती से जुड़ रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण बीज संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण, किसानों को बेहतर बाजार और ब्रांडिंग के माध्यम से दून बासमती को उसकी पुरानी पहचान दिलाना है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 65 हेक्टेयर में हुए ट्रायल के दौरान 100 से अधिक किसानों से 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। इसके एवज में किसानों के खातों में 13 लाख से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस वर्ष भी रीप और हिलान्स के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रशासन ने विकासनगर में दून बासमती के लिए सीड बैंक और परीक्षण सुविधा विकसित करने की भी योजना बनाई है। मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह के अनुसार, एक समय 550 हेक्टेयर में होने वाली दून बासमती की खेती घटकर 150-200 हेक्टेयर तक रह गई थी, जिसे अब फिर से विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘प्रशासन और कृषि विभाग कर रहा पूरा सहयोग’

हरबर्टपुर निवासी किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने बताया कि दून बासमती की खेती को बढ़ावा देने में जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान की ओर से किसानों को पूरा सहयोग मिल रहा है। उनके क्षेत्र के करीब 25 से 30 किसान दून बासमती के पुनर्जीवन अभियान से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयास और जिला प्रशासन की अभिनव पहल से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी दून बासमती को नया जीवन मिल रहा है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इसकी खेती का क्षेत्र बढ़ेगा और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य भी मिलेगा।

बीज से ब्रांडिंग तकः दून बासमती के संरक्षण की समग्र पहल

दून बासमती के पुनर्जीवन के लिए जिला प्रशासन की ओर से खेती के विस्तार से लेकर बीज संरक्षण, वैज्ञानिक टेस्टिंग, किसानों से सीधी खरीद, बेहतर बाजार और ब्रांडिंग तक समग्र स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 के सफल ट्रायल और इस वर्ष बढ़े खेती क्षेत्र ने इस पारंपरिक बासमती की वापसी की उम्मीद को मजबूत किया है।

किसानों का कहना है कि प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से दून बासमती की खेती के प्रति उनका विश्वास बढ़ा है और भविष्य में इसकी खेती का दायरा और बाजार दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय