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आईआईटी रुड़की ने अनुभवात्मक शिक्षा पर वृत्तचित्र बनाया, 14 नवंबर को होगा प्रसारण

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आईआईटी रुड़की ने अनुभवात्मक शिक्षा पर वृत्तचित्र बनाया, 14 नवंबर को होगा प्रसारण


हरिद्वार, 06 नवंबर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने भारत की बदलती शिक्षा व्यवस्था और अनुभवात्मक अधिगम पर आधारित वृत्तचित्र तैयार किया है। ‘अनुभवात्मक शिक्षा : भारत के परिवर्तनकारी विद्यालयों से सीख’ शीर्षक से बनी करीब 25 मिनट की इस फिल्म में पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के बीच संबंधों को दर्शाया गया है। वृत्तचित्र को दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण के लिए चुना गया है और बाल दिवस के अवसर पर 14 नवंबर को इसका प्रसारण संभावित है।

आईआईटी रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग की शोधार्थी पारिसा एपलगार्थ ने अपने पीएचडी शोध के तहत इस वृत्तचित्र का निर्माण किया है। इसमें प्रो. अन्दलिब तारिक और प्रो.विनय शर्मा ने मार्गदर्शन दिया। संस्थान के निदेशक प्रो.कमल किशोर पंत के नेतृत्व में तैयार वृत्तचित्र का प्रदर्शन आईआईटी रुड़की में किया गया।

वृत्तचित्र में देश के विभिन्न विद्यालयों, गुरुकुलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किए गए क्षेत्रीय अध्ययन के आधार पर बताया गया है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें व्यावहारिक अनुभव, जिज्ञासा, सक्रिय सहभागिता, मार्गदर्शन और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। फिल्म में भारतीय गुरुकुल परंपरा में निहित व्यक्तित्व के समग्र विकास की अवधारणा को आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में प्रासंगिक बताया गया है।

प्रो.अन्दलिब तारिक ने कहा कि वृत्तचित्र का उद्देश्य अनुभवात्मक शिक्षा को सैद्धांतिक चर्चा से आगे ले जाकर उसके व्यावहारिक स्वरूप और संभावनाओं को सामने लाना है। इसके जरिए यह समझने का प्रयास किया गया है कि अनुभव, जिज्ञासा और मूल्यों पर आधारित शिक्षा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को किस प्रकार नई दिशा दे सकती है।

शोधार्थी पारिसा एपलगार्थ ने बताया कि विभिन्न विद्यालयों में बच्चों को स्वयं निर्माण करते, सवाल पूछते और अपनी सीखने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेते हुए देखा गया। इन अनुभवों को फिल्म के माध्यम से शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है, ताकि शिक्षा के नए विकल्पों पर व्यापक चर्चा हो सके।

वृत्तचित्र प्रदर्शन के साथ ‘भारत में अनुभवात्मक शिक्षा का भविष्य’ विषय पर परिचर्चा भी हुई। इसमें हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भानु दुग्गल, नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति प्रो. आनंद श्रीवास्तव और अनंत राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के बोर्ड सदस्य मौलिक भगत ने विचार रखे।

परिचर्चा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने, व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा में इसकी उपयोगिता और खोज आधारित शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों के समग्र विकास पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों सहित करीब 175 लोगों ने भाग लिया।

प्रो.विनय शर्मा ने कहा कि अनुभव से अनुभूति और अनुभूति से जीवन की समझ विकसित होना ही अनुभवात्मक अधिगम का सार है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और विशेषकर गुरुकुल शिक्षा पद्धति आधुनिक शिक्षा को अधिक समग्र और जीवनोपयोगी बनाने में मार्गदर्शन दे सकती है।

यह वृत्तचित्र आईआईटी रुड़की के यांत्रिक एवं औद्योगिक अभियांत्रिकी विभाग की अनुभवात्मक अधिगम पहल का हिस्सा है। इस पहल को एनटीपीसी लिमिटेड का सहयोग प्राप्त है। संस्थान के अनुसार, इसका उद्देश्य शोध और शिक्षा के बीच की दूरी कम करने के साथ अनुभवात्मक शिक्षा के विचार को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला