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अखाड़े की जमीन बिक्री का आरोप, संत गणेश ने सौंपा ज्ञापन

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अखाड़े की जमीन बिक्री का आरोप, संत गणेश ने सौंपा ज्ञापन


हरिद्वार, 24 जुलाई (हि.स.)। पंजाब के मूल डेरे के नए अखाड़े के संत गणेश दास उदासीन ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष (निरंजनी गुट) को ज्ञापन सौंपकर उनके विरुद्ध किए गए बहिष्कार को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका बहिष्कार अनुचित तरीके से किया गया, जिससे उनकी धार्मिक एवं परंपरागत गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

ज्ञापन में गणेश दास उदासीन ने बताया कि महाकुंभ के दौरान भी उनका बहिष्कार किया गया था, जिसके कारण उन्हें धार्मिक आयोजनों और अखाड़े की गतिविधियों से दूर रखा गया। उन्होंने अखाड़ा परिषद से इस निर्णय पर पुनर्विचार कर उन्हें सम्मानपूर्वक पूर्ववत स्थान देने की मांग की।

संत गणेश दास उदासीन ने यह भी आरोप लगाया कि श्रीमहंत भगत राम और उनके साथ जुड़े कुछ लोग अखाड़े की भूमि एवं अन्य संपत्तियों की बिक्री में संलिप्त हैं। उनका कहना है कि अखाड़े की संपत्तियां संत समाज और धार्मिक परंपराओं की धरोहर हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने परिषद से इन आरोपों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने जूना अखाड़े में अखाड़ा परिषद पदाधिकारियों से मुलाकात कर अपनी बात विस्तार से रखी और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा जताई। वहीं, नया उदासीन अखाड़े के मुखिया महंत भगत राम महाराज ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि संबंधित संतों का अखाड़े से कोई संबंध नहीं है और उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़े की संपत्तियों के संबंध में लगाए गए आरोपों में कोई सत्यता नहीं है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला