टीबी मुक्त भारत अभियान की धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव नाराज
देहरादून, 18 जून (हि.स.)। उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए कुछ जनपदों में धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए, जहां मरीजों का सामान्य जांच आंकलन प्रतिशत 60 प्रतिशत से कम रहा है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अगले एक सप्ताह के भीतर सामान्य जांच आंकलन कार्य को 100 प्रतिशत पूरा किया जाए तथा उच्च संवेदनशील और जोखिम वाले गांवों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने डीजी हेल्थ स्तर पर अभियान की प्रतिदिन समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने तथा कम स्क्रीनिंग वाले जनपदों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्क्रीनिंग बढ़ाने और अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने को कहा।
बैठक में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार के लिए गर्भावस्था की प्रथम तिमाही में पंजीकरण बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
उन्होंने सभी जनपदों में एएनसी जांच बढ़ाने, जन्म प्रतीक्षा गृहों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर महिला एवं बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटरों का उपयोग करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने मानसून के मद्देनजर दूरस्थ क्षेत्रों में चिन्हित हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को बर्थ वेटिंग होम्स में स्थानांतरित करने और प्रसव के बाद हाई-रिस्क माताओं की पहचान और प्रबंधन को मजबूत करने पर बल दिया, ताकि रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल. फैनाई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, नितेश झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. आर. राजेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ . एस. एन. पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, आयुक्त दीपक रावत एवं आनन्द स्वरूप सहित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

