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उत्तराखंड में बिजली नुकसान पर सख्ती, कुमाऊं में 250 से अधिक चोरी के मामले दर्ज

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उत्तराखंड में बिजली नुकसान पर सख्ती, कुमाऊं में 250 से अधिक चोरी के मामले दर्ज


-ऊर्जा निगम ने पुलिस के साथ शुरू किया अभियान, मुख्यमंत्री धामी ने बिजली चोरी रोकने के दिए निर्देश

देहरादून, 17 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड में बिजली चोरी और वितरण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने के लिए ऊर्जा निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। कुमाऊं मंडल में पुलिस की मदद से चलाए जा रहे अभियान के तहत बिजली चोरी के 250 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बिजली चोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के कुछ मैदानी क्षेत्रों में बिजली वितरण के दौरान होने वाला नुकसान निर्धारित स्तर से काफी अधिक है। इससे निगम की आय प्रभावित होती है और बिजली आपूर्ति की लागत का दबाव बढ़ता है। इस नुकसान में बिजली चोरी, बिलों का भुगतान नहीं होना और तकनीकी कारणों से होने वाली बिजली हानि जैसे विभिन्न कारक शामिल हैं।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के विस्तृत टैरिफ आदेश में ऊर्जा निगम के वितरण और एटीएंडसी नुकसान का विवरण दिया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गदरपुर में 30.58 प्रतिशत, जसपुर में 27 प्रतिशत, खटीमा में 53 प्रतिशत, लक्सर में 27 प्रतिशत, लंढौरा में 69.40 प्रतिशत, मंगलौर में 47.62 प्रतिशत और सितारगंज में 27.25 प्रतिशत वितरण हानि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों की संबंधित अवधि और गणना की पद्धति के आधार पर पुष्टि आवश्यक है।

इन क्षेत्रों में बिजली वितरण के दौरान होने वाली अधिक हानि ऊर्जा निगम के लिए चुनौती बनी हुई है। निगम को नुकसान कम करने के लिए बिजली चोरी पर नियंत्रण, बकाया बिलों की वसूली और वितरण व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

तीन वर्षों में वितरण हानि का उतार-चढ़ाव

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ऊर्जा निगम का कुल वितरण नुकसान वित्तीय वर्ष 2021-22 में 14.70 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 16.39 प्रतिशत हो गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह घटकर 15.63 प्रतिशत रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वितरण हानि को कम करने के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत है।

ऊर्जा निगम ने बिजली चोरी की पहचान करने के लिए तकनीकी उपाय भी शुरू किए हैं। इसके तहत ट्रांसफार्मर स्तर पर बिजली की खपत और आपूर्ति का मिलान करने के लिए दोहरे मीटर लगाए जा रहे हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति और बिल की गई खपत के बीच कितना अंतर है।

यूपीसीएल के कुमाऊं क्षेत्र के मुख्य अभियंता शेखर त्रिपाठी के अनुसार, बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। हल्द्वानी, रामनगर और काशीपुर में पुलिस बल की मदद से कार्रवाई करते हुए 250 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस बल उपलब्ध होने के साथ अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बिजली चोरी रोकना ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी है। इससे होने वाला आर्थिक नुकसान सरकार और आम उपभोक्ताओं, दोनों को प्रभावित करता है। उन्होंने नुकसान रोकने के लिए सख्ती से कार्रवाई करने और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय