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टोंस नदी पुल क्षतिग्रस्त मामले की जांच में लापरवाही उजागर, जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज

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टोंस नदी पुल क्षतिग्रस्त मामले की जांच में लापरवाही उजागर, जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज


- एप्रोच रोड टूटने पर अधिशासी अभियंता राजेश कुमार संबद्ध,विभागीय कार्रवाई शुरू

देहरादून, 7 अगस्त (हि.स.)। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी के नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रारंभिक जांच में जिम्मेदारी तय होने के बाद संबंधित डिजाइन कंसल्टेंट और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

शासन के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को पत्र भेजकर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने को कहा है। जांच में एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के लिए संबंधित डिजाइन कंसल्टेंट और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट की भूमिका सामने आई है। शासन ने पुल को भविष्य में नुकसान से बचाने के लिए सुझाए गए सुधारात्मक उपायों की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।

वहीं,मामले में अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को प्रमुख अभियंता,लोक निर्माण विभाग कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उन्हें बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

लोक निर्माण विभाग की जांच में सामने आया कि पुल निर्माण के दौरान नदी डायवर्जन से संबंधित आवश्यक डिजाइन उपलब्ध नहीं कराया गया था। नदी के तल की क्रॉस स्लोप और घुमावदार प्रवाह को ध्यान में रखते हुए जल प्रवाह प्रबंधन के उपाय नहीं किए गए, जिसके कारण नदी का बहाव एक स्पान की ओर केंद्रित हो गया और एबटमेंट के पास भारी स्कॉरिंग से एप्रोच रोड के नीचे कैविटी बन गई।

जांच रिपोर्ट में तकनीकी निगरानी,गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंधीय दायित्वों के पालन में अधिशासी अभियंता की प्रथम दृष्टया लापरवाही और पर्यवेक्षण में कमी का उल्लेख किया गया है। शासन ने उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-2003 के तहत आगे की विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय