मंत्री बने पांचों विधायकों का राजनीति अनुभव बनेगा 2027 का अचूक अस्त्र
देहरादून, 20 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड के मंत्रिमंडल में जिन पांच विधायकों की मंत्री पद पर ताजपोशी हुई हैं, वे पांचों भाजपा नेताओं का अपना एक बड़ा सामाजिक दायरा है और ये जनता में लोक प्रिय छवि भी रखते हैं। इनके राजनीतिक अनुभव, चुनावी रणनीति और जनता में गहरी पैठ भाजपा के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव में एक अचूक अस्त्र बन सकता है।
मदन कौशिक
उत्तराखंड की राजनीति के कद्दावर नेता मदन कौशिक का जन्म 11 जनवरी 1965 को जनपद हरिद्वार के इमली खेड़ा (रुड़की) में हुआ। उनके पिता स्व रमेश चन्द्र शर्मा व माता स्व श्यामो देवी थीं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा इमली खेड़ा में हुई, जबकि उच्च शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से बीएससी के रूप में पूर्ण की। उनकी राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई। वे वर्ष 1985 में वे गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में विभिन्न संगठनात्मक दायित्व निभाते हुए हरिद्वार के जिला महामंत्री और जिलाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वर्ष 2002 में वे पहली बार हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2007, 2012, 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज कर पांच बार विधायक बने। वर्ष 2007 में उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की और राज्य सरकार में विद्यालयी शिक्षा, गन्ना विकास, पर्यटन, शहरी विकास समेत कई विभागों के मंत्री बने। वर्ष 2012 में उन्हें “उत्कृष्ट विधायक” सम्मान से नवाजा गया और वे विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष भी रहे। 2017 में पुनः विधायक चुने जाने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरान उन्होंने शहरी विकास, आवास, संसदीय कार्य सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला और शासकीय प्रवक्ता भी रहे।
मार्च 2021 से जुलाई 2022 तक वे भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पुनः बहुमत हासिल किया। इसके अतिरिक्त वे पार्टी के मुख्य सचेतक, प्रदेश उपाध्यक्ष तथा राष्ट्रीय कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य भी रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें पहचान मिली, जब 13 अप्रैल 2018 को लंदन स्थित हाउस ऑफ कॉमन्स में “भारत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। वर्तमान में मदन कौशिक हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे
प्रदीप बत्रा
रुड़की विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रदीप बत्रा का राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन सक्रिय जनसेवा और प्रशासनिक अनुभव से जुड़ा रहा है। प्रदीप बत्रा का जन्म 12 सितम्बर 1969 को हुआ। उनके पिता स्व. राम प्रकाश बत्रा तथा माता स्व. ईश्वरी देवी थीं। उनकी पत्नी मनीषा बत्रा वरिष्ठ समाज सेविका हैं। वे 33, सिविल लाइन, जादूगर रोड, रुड़की (हरिद्वार) के निवासी हैं। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की है। वे हिन्दी, अंग्रेजी और पंजाबी भाषाओं का ज्ञान रखते हैं।
प्रदीप बत्रा का राजनीतिक सफर वर्ष 2008 में नगर पालिका परिषद, रुड़की के अध्यक्ष के तौर पर शुरू हुआ। के रूप में जनता का विश्वास प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने “क्लीन सिटी-ग्रीन सिटी” एवं “मेरा शहर, मेरा गर्व” जैसे अभियानों की शुरुआत की। वर्ष 2012 में पहली बार रुड़की विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2013-14 में उन्हें मुख्यमंत्री के पर्यटन सलाहकार (कैबिनेट मंत्री स्तर) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। वर्ष 2017 में वे दूसरी बार 12,542 मतों और 2022 में लगातार तीसरी बार 2,277 मतों से जीत दर्ज की।
प्रदीप बत्रा की सामाजिक व संगठनात्मक भूमिका को देखे तो वे भारत विकास परिषद के कार्यकारी सदस्य, रोटरी क्लब रुड़की के सदस्य, ग्रेब्रिलाइट एलुमिनी एसोसिएशन के आजीवन सदस्य और श्री साईईश्वर एजुकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं।व्यावसायिक तौर पर बत्रा एक सफल उद्यमी के रूप में भी पहचाने जाते हैं। उनके व्यावसायिक उपक्रमों में प्रकाश स्वीट्स, होटल एवं रेस्टोरेंट, दिल्ली पब्लिक स्कूल रुड़की और श्री साईईश्वर फूड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड (भगवानपुर) शामिल हैं।
सामाजिक योगदान के तौर पर वे भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को सहयोग प्रदान करते हैं। आमजन तक सरकारी योजनाओं, पेंशन, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, अटल आयुष्मान योजना, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, कौशल विकास योजना, नंदा गौरा योजना आदि का लाभ पहुंचाने के लिए सेवा केंद्र के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।
जन समस्याओं के समाधान के लिए नियमित जनता दरबार आयोजित करना, गंगा स्वच्छता अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, पर्यावरण जागरूकता एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन उनकी प्रमुख पहलों में शामिल है। इसके अलावा, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण व मशीनें उपलब्ध कराना तथा युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करना भी उनकी प्राथमिकताओं में रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में वे समय-समय पर मेडिकल कैंप और रक्तदान शिविरों का आयोजन कराते रहे हैं।
भरत सिंह चौधरी
रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट से विधायक भरत सिंह चौधरी राज्य की राजनीति में एक सक्रिय और अनुभवी जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते हैं। उनका जन्म वर्ष 1959 में तत्कालीन चमोली जनपद के रानीगढ़ पट्टी स्थित गडबू गांव में हुआ। उनके पिता स्व सुबेदार छोटाण सिंह चौधरी थे।
चौधरी ने प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय घोलतीर से प्राप्त की और इंटरमीडिएट की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज, गौचर (चमोली) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज, देहरादून से बी.ए. एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की। भरत सिंह चौधरी का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वर्ष 1979 से 1982 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। इसके बाद उन्होंने विभिन्न सहकारी एवं स्थानीय निकायों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
वर्ष 1985 में साधन सहकारी समिति (मिनी बैंक) नगरासू के अध्यक्ष बने, जबकि 1988 में ग्राम पंचायत मरोड़ा के प्रधान निर्वाचित हुए। वर्ष 1990 में वे जिला परिषद चमोली के सदस्य रहे। उन्होंने वर्ष 1993, 1996 और 2002 में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 2003 में उन्होंने देवभूमि रचनात्मक सहकारी समिति लिमिटेड की स्थापना की और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने 2007 और 2012 में रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 2013 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
वर्ष 2017 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में रुद्रप्रयाग विधानसभा से चुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इस चुनाव में उन्होंने लगभग 15 हजार मतों के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित किया। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार करते हुए 30 हजार से अधिक मत प्राप्त कर पुनः जीत दर्ज की। वर्तमान में वे उत्तराखंड विधानसभा की विभिन्न समितियों के सदस्य हैं और संस्कृत भाषा प्रोत्साहन समिति के सभापति के रूप में भी दायित्व निभा रहे हैं।
खजान दास
खजान दास का जन्म टिहरी गढ़वाल में 16 जून 1958 को हुआ। देहरादून जिले के राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जो अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में विधायक के रूप में जीत हासिल की ।
उन्होंने कक्षा 8 उत्तीर्ण की और बाद में स्कूल छोड़ दिया। वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। उन्हें 37,027 वोट मिले और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजकुमार को 11,163 वोटों के अंतर से हराया। इससे पहले, उन्होंने 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजकुमार को 8,632 वोटों के अंतर से हराया था। खजान दास वर्ष 2007 में पहली बार भाजपा के सदस्य के रूप में धनौल्टी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी।
राम सिंह कैडा
15 मार्च 1974 को नैनीताल जनपद के ओखलकांडा विकासखंड के कैड़ा गांव में जन्मे राम सिंह कैड़ा ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद एमबीपीजी महाविद्यालय हल्द्वानी से उच्च शिक्षा ग्रहण की और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभायी। वर्ष 1999 में छात्र संघ अध्यक्ष बनने से पूर्व भी वह छात्र संघ के विभिन्न पदों पर निर्वाचित रहे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर सक्रिय भागीदारी की, आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल यात्राएं भी कीं, जिससे उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत हुई।
प्रारंभ में कांग्रेस से जुड़े रहे कैड़ा भीमताल से टिकट न मिलने पर वर्ष 2017 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े, जहां उन्होंने 95,669 मतों में से 18,878 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। निर्दलीय रहते हुए भी उनका झुकाव भारतीय जनता पार्टी की तत्कालीन सरकार की ओर रहा और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए टिकट दिया, जिसे उन्होंने पुनः जीत में परिवर्तित किया।
छात्र राजनीति से उनका राजनीतिक सफर जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और विधायक से मंत्री पद तक पहुंचा है, उनकी पत्नी कमलेश कैड़ा भी ब्लॉक प्रमुख रही हैं। कैड़ा का राजनीतिक सफर एक नजर मेंरू 1994 में एमबीपीजी कॉलेज के छात्र संघ में उप सचिव और 1997 में सचिव रहे। 1999 में छात्रसंघ अध्यक्ष बने, 2001 में कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के अध्यक्ष बने। 2001 में उत्तराखंड संयुक्त छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष बने। 2008 में जिला पंचायत सदस्य, नैनीताल, 2008 व 2012 में क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे। 2017 से 2022 के बीच भीमताल से निर्दलीय और 2022 भाजपा से विधायक निर्वाचित हुए और अब 2026 में धामी सरकार में मंत्री बने हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

