तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर में गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो’, कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु
हरिद्वार, 22 अगस्त (हि.स.)। कनखल स्थित श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर के 34वें श्रावण मास वार्षिकोत्सव महोत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मंदिर परिसर कृष्ण भक्ति में डूबा नजर आया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और कथा व्यास आचार्य दीपक भाई जोशी के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का रसपान किया। कृष्ण जन्म का प्रसंग आते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।
कथा व्यास आचार्य दीपक भाई जोशी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म की कथा में देवकी-वसुदेव, कंस के अत्याचार और भगवान श्रीहरि के अवतार का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का संदेश है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से कर्म, धर्म, प्रेम, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कृष्ण जन्म प्रसंग के दौरान कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से मंगल गीत गाए और कृष्ण जन्मोत्सव मनाया।
इस अवसर पर श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर के परमाध्यक्ष श्रीमहंत त्रिवेणी दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के जीवन को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में तिलभाण्डेश्वर महादेव की आराधना के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर है।
कथा के मुख्य यजमान मीना अग्रवाल, सत्यप्रकाश अग्रवाल, मिथलेश लवानिया व बनवारी लाल लवानिया, मथुरा वाले रहे। यजमान परिवार ने कथा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके पश्चात भगवान की मंगल आरती उतारी गई। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान का स्मरण किया तथा विश्व एवं लोक कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। कथा के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण बना रहा। श्रद्धालु देर तक कथा का श्रवण करते रहे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

