सत्य, प्रेम, दया और सेवा मनुष्य जीवन के आधार: दास
हरिद्वार, 24 अप्रैल (हि.स.)। 21वें गुरू स्मृति ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का शुक्रवार को विधिवत विश्राम हो गया। कथा विराम से पूर्व कथा व्यास ने भगवान की महिमा, भक्ति के महत्व और जीवन के अंतिम सत्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रद्धालु श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कैसे राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रद्धा और भक्ति से कथा सुनकर जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों को समझा तथा मोक्ष प्राप्ति का मार्ग पाया।
उन्होंने कलियुग में मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को सर्वोत्तम उपाय बताते हुए कहा कि इससे जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आने वाली पीढ़ियां भी सद्मार्ग पर अग्रसर होती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, दया और सेवा की भावना को अपनाएंगे।
इस अवसर पर मलूक पीठाधीश्वर ने कहा कि कलियुग में भगवान की कथा ही ऐसी शक्ति है, जो दोषयुक्त मनुष्य को भी दोषमुक्त कर सकती है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं, धर्म की स्थापना और भक्ति का विशेष महत्व वर्णित है।
कार्यक्रम में बिष्णु दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत हमें सिखाती है कि सत्य, प्रेम, दया और सेवा ही मनुष्य जीवन के मूल आधार हैं। मनुष्य का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति और आत्मकल्याण है। भगवान के नाम का स्मरण मन को शांति और आत्मा को संतोष प्रदान करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मां गंगा के प्रति संवेदनशील रहने, गंगा को प्रदूषित होने से बचाने और उसे निर्मल बनाए रखने में सहयोग का आह्वान किया।
कथा के दौरान सरयू दास महाराज, विमल दास महाराज, प्रेमदास महाराज सहित कई संत-महात्मा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

