सच्चा सुख भक्ति, ज्ञान और आत्मसंयम में निहित: श्रीमहंत बिष्णु दास
हरिद्वार, 22 अप्रैल (हि.स.)। 21वें गुरु महोत्सव के अंतर्गत आयोजित गुरु स्मृति कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्रीमहंत बिष्णु दास महाराज ने कहा कि सच्चा सुख केवल भक्ति, ज्ञान और आत्मसंयम में ही निहित है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए।
सेवा समिति सभागार में चल रही भागवत कथा के दौरान उन्होंने बताया कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति है। उन्होंने सभी से प्राणी मात्र के कल्याण के लिए सोचने और हरि भजन में मन लगाने का आह्वान किया, जिससे जीवन रूपी भवसागर से पार पाया जा सके।
इस अवसर पर कथा व्यास चिन्मयानंद बापू ने भक्ति और ज्ञान के समन्वय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान सदैव धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। साथ ही ब्रह्मांड की संरचना और जीव के जीवन के उद्देश्य को समझाते हुए भगवान की महिमा का गुणगान किया।
कथा के दौरान राजा प्रियव्रत और उनके वंशजों की कथा सुनाते हुए धर्मपूर्वक शासन और भक्ति के महत्व को बताया गया। भगवान ऋषभदेव के जीवन से त्याग, वैराग्य और आत्मसंयम का संदेश दिया गया, वहीं भरत राजा की कथा के माध्यम से यह समझाया गया कि यदि मन भगवान से हटकर सांसारिक वस्तुओं में लग जाए तो साधना में बाधा उत्पन्न होती है।
कार्यक्रम में महंत सरयू दास (भावनगर), विमल दास (गुजरात), महंत प्रेम दास सहित कई संत-महात्मा उपस्थित रहे। इसके अलावा बृजमोहन सेठ, नितिन सेठ, वंदना, भव्य, अनिरुद्ध, पुनीत दास, रामचंद्र दास, गणेश, शालीग्राम, अमरदास, गौरव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

