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(अपडेट) विपक्षी हंगामे के बीच 7844.18 करोड़ के अनुपूरक बजट समेत कुल 10 विधेयक हुए पास

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(अपडेट) विपक्षी हंगामे के बीच 7844.18 करोड़ के अनुपूरक बजट समेत कुल 10 विधेयक हुए पास


-गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस का कार्य स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार होने से पैदा हुआ गतिरोध

- वेल में आकर विपक्ष के विधायकों ने की नारेबाजी

- तीन-बार स्थगित हुई सदन की कार्यवाही -हंगामे के दौरान ही सरकार ने निपटाये विधायी कामकाज

गैरसैण (भराड़ीसैंण), 28 अक्टूबर (हि. स.)। उत्तराखंड विधानसभा का गैरसैंण में आयोजित दो दिवसीय मानसून सत्र का अंतिम व दूसरा दिन हंगामा की भेंट चढ़ गया। कार्य स्थगन प्रस्ताव पीठ द्वारा मंजूर नहीं होने के कारण मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने वेल में आकर जमकर हंगामा किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की । इस दौरान बार-बार सदन की कार्यकर्ता ही स्थगित हुई। हंगामे और नारेबाजी के बीच ही सरकार ने सभी विधायी कामकाज निपटाए । लगभग 1:10 बजे सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इससे पहले सरकार द्वारा सदन में पेश अनुपूरक बजट समेत सभी 10 विधेयक पास हुए।

गैरसैंण में विधानसभा का सत्र मंगलवार को शुरू हुआ था। कार्यवाही के पहले दिन पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि दी गई। इसके साथ ही दो अध्यादेश और अनुपूरक बजट समेत दस विधेयक सदन में पेश किए गए । श्रद्धांजलि कार्यक्रम के कारण मंगलवार को प्रश्न काल और शून्य काल स्थगित रहा है और विपक्ष ने भी कार्यवाही में सहयोग किया। लेकिन बुधवार को जैसे ही सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने भ्रष्टाचार पर नियम 310 के तहत कार्यस्थल प्रस्ताव का नोटिस दिया और सभी कार्यवाही को स्थगित करते हुए इस पर चर्चा की मांग की। आमतौर पर पीठ द्वारा 310 के नोटिस को 58 में सुनने के परंपरा रही है। लेकिन बुधवार को पीठ ने इस नोटिस को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए पहला प्रश्न शुरू ही हुआ था कि विपक्ष के सभी विधायक वेल में आ गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे । इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई। हालांकि हर बार मुख्य विपक्षी गर्ल कांग्रेस के विधायकों का हंगामा जारी रहा इसी हंगामे के बीच सदन के विधायक कामकाज भी चलते रहे प्रश्न पेड़ के बाद सकल हुआ और उसके बाद सदन में मंगलवार को पेश किए गए अनुपूरक बजट के विभाग बार अनुदान मांगों पर चर्चा हुई इसे पारित कराया गया। उसके बाद 7844 करोड़ के अनपूरक बजट को पारित कराया गया। अनुपूरक बजट पास होने के बाद सदन में पेश किए गए सभी नौ विधेयकों को भी संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल और संबंधित विभाग के मंत्रियों ने पास कराया। सभी विधेयक और अनुपूरक बजट पास हो जाने के बाद दोपहर 1:10 पर सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

विधानसभा सत्र के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में अध्यक्ष ने बताया कि नियम 300 के तहत 34, नियम 53 के तहत 17 और नियम 58 के तहत सात सूचनाएं प्राप्त हुईं। नियम 300 के तहत प्राप्त सभी 34 सूचनाओं को ध्यानाकर्षण के लिए भेजा गया। नियम 53 के तहत प्राप्त सभी 17 सूचनाओं को भी ध्यानाकर्षण के लिए भेजा गया। नियम 58 के तहत तीन सूचनाएं स्वीकार की गईं, जबकि दो सूचनाओं को ध्यानाकर्षण के लिए भेजा गया।

दो दिवसीय सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही कुल आठ घंटे चार मिनट चली। विधानसभा की ओर से जारी कार्यवाही के समय संबंधी विवरण के अनुसार, सत्र के पहले दिन मंगलवार को सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शाम 5:58 बजे तक चली, जबकि बुधवार को विभिन्न अवसरों पर कार्यवाही संचालित हुई।

विवरण के अनुसार, 27 अक्टूबर को सदन की कार्यवाही छह घंटे 58 मिनट चली। वहीं, 28 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से 11:05 बजे तक, 11:20 बजे से 11:25 बजे तक, दोपहर 12 बजे से 12:05 बजे तक व 12:15 बजे से दोपहर 1:06 बजे तक सदन की कार्यवाही चली।

इस प्रकार, दोनों दिनों में सदन की कार्यवाही का कुल समय आठ घंटे चार मिनट दर्ज किया गया।

वन्यजीव संघर्ष और हाथियों से सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवारों के लंबित भुगतान के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच ये दीवारें बनाई गई थीं। संबंधित लोगों का भुगतान लंबे समय से लंबित था। उन्होंने सरकार से इन कार्यों की जांच कराकर भुगतान का रास्ता निकालने का आग्रह किया था।

अध्यक्ष ने बताया कि वन विभाग ने दीवारों की जांच और सत्यापन किया है। सत्यापन में दीवारें मौके पर मौजूद पाई गईं। उन्होंने कहा कि संबंधित लोग गरीब हैं और अपनी मेहनत की कमाई इन कार्यों में लगा चुके हैं। सात-आठ वर्ष से भुगतान लंबित होने के कारण उन्होंने सरकार को एक माह के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

विपक्ष के आचरण पर जताई नाराजगी

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने कहा कि सदन में जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। विपक्ष के विधायकों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन शब्दों की मर्यादा होनी चाहिए। हंगामे के दौरान विपक्ष के विधायकों ने कई गलत शब्दों का प्रयोग किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके पांच वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने निष्पक्ष रहते हुए सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अधिकतम अवसर देने का प्रयास किया है। इसके बावजूद सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल नहीं चलने देना दुर्भाग्यपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि सामूहिक फोटो के लिए विपक्ष को बुलाया गया था, लेकिन विपक्षी सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए। अध्यक्ष के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सदस्यों को अपनी समस्याएं रखने और सरकार के समक्ष विषय उठाने की परंपरा रही है।

उन्होंने सदन के भीतर कागज फाड़ने, किताबें पटकने और अपशब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदस्य अपनी बात तीखे शब्दों में रख सकते हैं, लेकिन भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। सदन की कार्यवाही को बच्चे, भावी नेता और देश-दुनिया के लोग देखते हैं। ऐसे में सदन में मर्यादित व्यवहार होना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार सवालों का जवाब देने से बचना चाह रही है। एक कैबिनेट मंत्री पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं और हम इसी मुद्दे पर सदन में चर्चा चाहते थे, लेकिन पीठ ने नियम 310 का हमारा नोटिस स्वीकार नहीं किया। इस कारण मजबूर होकर हमें वेल में आना पड़ा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विपक्ष के पास ना कोई मुद्दा है और ना ही सदन के अंदर सार्थक चर्चा करने की हिम्मत। इस कारण वे हंगामा करते रहे और उन्होंने सदन की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय