गुरुकुल विवि में रजिस्ट्रार संग मारपीट
हरिद्वार, 31 अक्टूबर (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में कर्मचारियों द्वारा रजिस्ट्रार के साथ कथित मारपीट की घटना पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के विद्यार्थी व छात्र प्रतिनिधि सोकेन्द्र बालियान ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में हिंसा की घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रहे विवाद, अशांति और अव्यवस्था के मामले संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सोकेन्द्र बालियान ने कहा कि शिक्षा के केंद्र में संवाद, अनुशासन, सहिष्णुता और वैचारिक असहमति का सम्मान होना चाहिए। किसी भी विवाद का समाधान मारपीट से नहीं, बल्कि संवैधानिक, लोकतांत्रिक और संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि देश की गौरवशाली शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी प्रतिष्ठा और गरिमा बनाए रखना प्रशासन, कर्मचारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों सहित पूरे गुरुकुल परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है।
हर वर्ग की समस्याएं बढ़ा रहीं चिंता
बालियान ने विश्वविद्यालय की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि विद्यार्थी, स्थायी एवं अस्थायी कर्मचारी और शिक्षक विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों की लंबित मांगें, शिक्षकों एवं फैकल्टी का विश्वविद्यालय छोड़ना, निलंबन की घटनाएं और लगातार बढ़ते विवाद चिंता का विषय हैं। इन परिस्थितियों का असर विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक माहौल पर पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बन रही हैं कि विवाद संवाद और समाधान के बजाय मारपीट तक पहुंच रहे हैं? पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा कर कारणों का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
सोकेन्द्र बालियान ने रजिस्ट्रार के साथ हुई कथित मारपीट की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, घायल व्यक्ति को उचित चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा प्रशासन एवं कर्मचारी संगठनों के बीच तत्काल सकारात्मक संवाद शुरू करने की मांग की। साथ ही स्थायी एवं अस्थायी कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का न्यायसंगत समाधान करने और शिक्षकों, फैकल्टी के विश्वविद्यालय छोड़ने, निलंबन तथा अन्य विवादों की पारदर्शी समीक्षा पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन और सामान्य व्यवस्था बहाल करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या प्रशासन का विरोध करना नहीं, बल्कि गुरुकुल की गरिमा, शिक्षा की गुणवत्ता, कर्मचारियों के सम्मान और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
बालियान ने कहा कि आज की घटना पर शब्द भी मानो निःशब्द हैं। आखिर कब सुधरेंगे गुरुकुल के हालात, कब थमेगा अव्यवस्था और विवादों का दौर और कब लौटेगा गुरुकुल का खोया हुआ गौरव? गुरुकुल बचेगा, तभी उसका गौरवशाली इतिहास बचेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

