आर्य समाज की गुटबाजी खत्म हो, तभी सिद्धांतों का होगा प्रभावी प्रचार: यतीश्वरानंद
हरिद्वार, 12 जुलाई (हि.स.)। आर्य समाज की संस्थाओं में व्याप्त गुटबाजी को समाप्त कर संगठन को एकजुट करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। तभी महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों का प्रभावी ढंग से प्रचार-प्रसार संभव हो सकेगा। यह बात पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने रविवार को वेद मंदिर आश्रम में आयोजित आर्य समाज की हरिद्वार उप प्रतिनिधि सभा की बैठक में कही।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि उत्तराखंड में आर्य समाज की संस्था का विधिवत पंजीकरण कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती के लिए सभी संस्थाओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना होगा। उन्होंने कहा कि गुटबाजी के कारण आर्य समाज के मूल सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार प्रभावित हो रहा है, इसलिए सभी संस्थाओं पर समन्वय और निगरानी की आवश्यकता है।
उन्होंने गौ-हत्या, जनसंख्या नियंत्रण, नशाखोरी और सामाजिक कुरीतियों पर सख्त कानून बनाने की पैरवी करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को संस्कारयुक्त बनाया जाए तथा वेदों के अध्ययन और प्रचार को बढ़ावा दिया जाए।
आर्य प्रतिनिधि सभा हरिद्वार के प्रधान यशपाल सिंह आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती के नाम पर गंगा घाट का निर्माण, विशेष पताका एवं महापुरुषों के चित्र लगाने, यज्ञशाला निर्माण तथा आर्यनगर चौक से शंकर आश्रम तक की सड़क का नाम महर्षि दयानंद मार्ग रखने का प्रस्ताव रखा। पूर्व प्रधान हाकम सिंह आर्य ने युवा पीढ़ी तक आर्य समाज के सिद्धांतों को पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
इस दौरान स्वामी ओमानंद, स्वामी चंद्र मुनि, मंत्री अरुण आर्य, पूर्व प्रधान मानपाल सिंह तथा कोषाध्यक्ष ब्रह्मपाल सिंह आर्य ने प्रत्येक घर पर आर्य पताका लगाने व परिवारवाद से ऊपर उठकर समाज के विस्तार के लिए कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में बड़ी संख्या में आर्य समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

