home page

सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना में भ्रष्टाचार का आरोप, अशोक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

 | 
सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना में भ्रष्टाचार का आरोप, अशोक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से मांगा जवाब


हरिद्वार, 15 जुलाई (हि.स.)। भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत वाले कार्य को 61 करोड़ रुपये में स्वीकृत कर गुजरात की एक कंपनी को सौंपा गया है। उन्होंने मेला अधिकारी सोनिका पर परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की।

त्रिपाठी ने कहा कि परियोजना की डीपीआर यूयूआईडीसी द्वारा तैयार की गई, कार्यदायी संस्था एनबीसीसी को बनाया गया और ठेका अहमदाबाद की कंपनी को दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उत्तराखंड में सक्षम एजेंसियां मौजूद हैं तो बाहर की कंपनी को काम क्यों दिया गया। मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूरे मामले पर सार्वजनिक जवाब और डीपीआर सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि सतीकुंड एक प्राचीन एवं पौराणिक तीर्थ है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां हरकी पैड़ी से भी अधिक श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए आते थे। तीर्थ का पुनरोद्धार होना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मेला अधिकारी सोनिका पर परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप लगाते हुए त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें डराने या गुमराह करने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा कि वह 20 बार जेल जा चुके हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान भी जेल गए थे।

पार्टी संगठन पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों से भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की बात सुनने के लिए कोई मंच नहीं है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में हरिद्वार को राज्य में शामिल कराने में अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज हरिद्वार की उपेक्षा हो रही है।

त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री से मिलने के कई प्रयास किए, लेकिन समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी पद नहीं मांगा। वह अटल बिहारी वाजपेयी की उस सोच में विश्वास रखते हैं जिसमें कार्यकर्ता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।

उन्होंने मांग की कि जिस तरह हरिद्वार भूमि घोटाले में कार्रवाई हुई, उसी तरह सतीकुंड परियोजना की लागत, ठेका प्रक्रिया और कार्यदायी संस्था के चयन की निष्पक्ष जांच हो।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला