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सनातन भारत की आत्मा, प्रहार करने वाले बौद्धिक और सांस्कृतिक आतंकवादी: स्वामी रामदेव

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सनातन भारत की आत्मा, प्रहार करने वाले बौद्धिक और सांस्कृतिक आतंकवादी: स्वामी रामदेव


हरिद्वार, 29 अक्टूबर (हि.स.)। पतंजलि विश्वविद्यालय में गुरुवार को 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया। वहीं, योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पुस्तक मेले का उद्घाटन किया।

सम्मेलन में भारतीय संस्कृति, संस्कारों, वेद, दर्शन, प्राचीन ज्ञान परंपरा और सनातन ग्रंथों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान स्वामी रामदेव ने सनातन को भारत की आत्मा बताते हुए इसके विरुद्ध टिप्पणी करने वालों को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सनातनी ग्रंथों में मिलावट का आरोप लगाते हुए उनके संरक्षण के लिए विद्वानों की बड़ी समिति गठित करने की बात भी कही।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने कहा कि भारतीय संस्कृति, धर्म और प्राचीन विद्याओं का संरक्षण कर इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। युवाओं को भारतीय ग्रंथों का अध्ययन कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि और तपोभूमि है। यहां से भारतीय दर्शन, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का संदेश पूरे देश में पहुंचना चाहिए।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भारतीय ग्रंथों के अध्ययन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आज के युवा यदि भारतीय ज्ञान परंपरा को समझेंगे और उसे अपने जीवन में आत्मसात करेंगे तो उनके भीतर रामत्व और कृष्णत्व के भाव को विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर बल दिया।

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि सनातन शाश्वत है और वर्तमान की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। सनातन को आधार बनाकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हुए विकसित और वैभवशाली भारत का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सनातन भारत देश की आत्मा है। भारत की आत्मा पर प्रहार करने वाले लोगों को उन्होंने बौद्धिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आतंकवादी बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों का आतंक नहीं चलने दिया जाएगा।

स्वामी रामदेव ने कहा कि वेद, पुराण, दर्शन, रामायण, महाभारत, महापुरुषों और देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दार्शनिक और तार्किक रूप से भी जवाब दिया जाएगा। किसी भी रूप में सनातन का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राच्य विद्या सम्मेलन का उद्देश्य व्यक्ति-व्यक्ति में ईश्वरत्व का भाव जगाना और समाज में एकत्व की भावना को मजबूत करना है। उनके अनुसार, सनातन को खंडित रूप में प्रस्तुत कर बदनाम करने के प्रयासों का जवाब भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और प्रमाणिकता के आधार पर दिया जाना चाहिए।

सनातनी ग्रंथों में मिलावट का आरोप, समिति गठित करने की बात

स्वामी रामदेव ने मुगल काल और ब्रिटिश काल के दौरान सनातनी ग्रंथों में मिलावट किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सनातन की मूल परंपरा और उसके ग्रंथों को लेकर प्रमाणिक अध्ययन की आवश्यकता है। इसके लिए पतंजलि योगपीठ में धर्माचार्यों, गुरुजनों और जगद्गुरु शंकराचार्यों के पावन सानिध्य में विद्वानों की एक बड़ी समिति गठित करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि सनातन ग्रंथों के संरक्षण, संवर्धन और प्रमाणिकता को लेकर शुक्रवार को पतंजलि योगपीठ के प्रांगण से एक बड़ा निर्णय लिया जाएगा। उनके वक्तव्य के अनुसार, ग्रंथों में कथित मिलावट के विषय को गंभीरता से लेते हुए इस दिशा में व्यापक स्तर पर काम किया जाएगा।

पुस्तक मेले का उद्घाटन, देशभर के विद्वान कर रहे सहभागिता

सम्मेलन के तहत आयोजित पुस्तक मेले का उद्घाटन योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने किया। मेले के माध्यम से पाठकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विद्वानों को भारतीय साहित्य, दर्शन, संस्कृत तथा प्राचीन ज्ञान परंपरा से संबंधित पुस्तकों को जानने-समझने का अवसर मिलेगा।

तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से प्राच्य विद्या, संस्कृत, भारतीय संस्कृति, वेद, दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी तथा साधु-संत शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में प्राचीन भारतीय ज्ञान, दर्शन और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा शोध को प्रोत्साहित करने के साथ ही वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन का आयोजन 31 अक्टूबर तक होगा। इसके माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर चर्चा कर प्राचीन साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर मंथन किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला