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अनुवाद के बिना विश्व साहित्य की संकल्पना संभव नहीं: गरचा

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अनुवाद के बिना विश्व साहित्य की संकल्पना संभव नहीं: गरचा


नैनीताल, 27 मार्च (हि.स.)। कुमाऊँ विश्वविद्यालय की रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजनपीठ में शुक्रवार को सुप्रसिद्ध छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा के 119वें जन्मदिवस पर आयोजित बारहवें महादेवी वर्मा स्मृति व्याख्यान में मुख्य वक्ता सरबजीत गरचा ने कहा कि विश्व साहित्य की संकल्पना अनुवाद के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने ‘समकालीन वैश्विक काव्य संसार और हिंदी: संवाद एवं अनुवाद’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अनुवाद विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करता है और यही वैश्विकता का आधार है। उन्होंने कहा कि आज की विश्व कविता में पहचान, विस्थापन, युद्ध, प्रतिरोध, बहुस्वरवाद और डिजिटल कविता जैसे विषय प्रमुख हैं तथा अनुवाद इन सभी के बीच समझ विकसित करता है।

उन्होंने अज्ञेय, कुँवर नारायण, केदारनाथ सिंह और मंगलेश डबराल जैसे हिंदी कवियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं के बीच व्यापक अनुवाद कार्य हुआ है।

विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि हिंदी में विश्व साहित्य के अनुवाद की सुदृढ़ परंपरा रही है और यही साहित्य के वैश्विक प्रसार का प्रमुख आधार है। कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए प्रो. चन्द्रकला रावत ने कहा कि अनुवाद से हिंदी साहित्य को नवीन दृष्टि और व्यापक आयाम मिले हैं। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं महादेवी वर्मा के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। सृजनपीठ के निदेशक प्रो. शिरीष कुमार मौर्य ने अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों और वक्ता के बीच संवाद भी आयोजित हुआ। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय रामगढ़ के प्राचार्य डॉ. नगेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीश कुमार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल आर्य, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. सुचित्रा अवस्थी, डॉ. राजेन्द्र कैड़ा, डॉ. अनिल कार्की, डॉ. कुमार मंगलम सहित डॉ. शशि पांडे, डॉ. कंचन आर्या, डॉ. मथुरा इमलाल, डॉ. माया शुक्ला, डॉ. हरीश जोशी, डॉ. संध्या गड़कोटी, डॉ. नीमा पंत, डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. शिव प्रकाश त्रिपाठी, सविता वर्मा, हिमांशु डालाकोटी, निर्मला कपिल, अरुणेश शुक्ल, कृष्ण जोशी, नंदकिशोर जोशी, महेश जोशी, हिमांशु विश्वकर्मा, ललित मोहन, सृष्टि गंगवार, शिवानी शर्मा, देवेंद्र कुमार, रोहित रौतेला, धनंजय पाठक, गुंजिता पंत, पाखी पांडे, प्रकृति सिंह, बहादुर सिंह कुँवर व ललित नेगी आदि शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी