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थिएटर इन एजुकेशन कार्यशाला में सिखाई नाट्य कला की तकनीक

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नई टिहरी, 21 अगस्त (हि.स.)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में डीएलएड प्रशिक्षुओं के लिए पांच दिवसीय थिएटर इन एजुकेशन कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में 39 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। शुक्रवार को प्राचार्य सुमेर सिंह कैंतुरा ने एनईपी के तहत थिएटर इन एजुकेशन की आवश्यकता एवं महत्व से रूबरू कराया।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुमन नेगी ने कार्यशाला के उद्देश्यों को बताया नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में पाठ्यक्रम और शिक्षण शास्त्र अधिगम समग्र, एकीकृत, आनंददायी और रूचिकर होना चाहिए। शिक्षण प्रक्रिया शिक्षार्थी केंद्रित हो। जो जिज्ञासा, खोज, अनुभव और संवाद के आधार पर संचालित हो। उन्होंने भाषायी विकास के लिए कार्यशाला के महत्व को रेखांकित कर बताया कि नाट्य कला स्कूली बच्चों को अपने विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।

जिससे बच्चों में स्वतंत्र चिंतन, भाषायी एवं सृजनात्मकता का विकास होता है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मुख्य संदर्भदाता उमंग ने थिएटर इन एजुकेशन के सैद्धांतिक पक्ष की जानकारी दी। कार्यशाला में विनोद पेटवाल, डा. वीर सिंह रावत, सीमा शर्मा, संजीव भट्ट, नरेश चंद कुमांई, डा. राज किशोर, सुष्मिता जोशी, निर्मला सिंह, हिमांशु रावत, अक्षत नेगी, नितिका, दीपक सिंह, मानसी, ऋतिक राणा उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी