योगगुरु रामदेव से मिला 8 फीट 2 इंच लंबा करण राठी, स्वास्थ्य काे लेकर दी सलाह
हरिद्वार, 12 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा के बहादुरगढ़ के मूलनिवासी और दुनिया के सबसे लंबे किशाेराें मे शामिल 8 फीट 2 इंच लंबे करण राठी ने
रविवार काे याेगगुरु स्वामी रामदेव से मुलाकात की। करण की असाधारण लंबाई को देखकर स्वामी रामदेव भी आश्चर्यचकित हुए और उन्होंने उसे स्वास्थ्य को लेकर विशेष सलाह दी।
किशोर करण राठी ने आज योगगुरु स्वामी रामदेव से मुलाकात की। 12वीं कक्षा के छात्र करण राठी ने स्वामी रामदेव को बताया कि वे आगे चलकर अपने पिता की तरह डॉक्टर बनना चाहता है। पढ़ाई के साथ-साथ करण बास्केटबॉल भी खेलते हैं, जिसमें उनकी लंबाई उन्हें विशेष बढ़त देती है।
इस माैके पर स्वामी रामदेव ने करण को नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सही दिनचर्या और योग के माध्यम से शारीरिक समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। करण ने बताया कि वे रोजाना करीब ढाई लीटर दूध पीते हैं। इस पर स्वामी रामदेव ने उन्हें तीन लीटर तक दूध लेने की अनुमति दी और पोषण पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
दुनिया के सबसे लंबे किशोरों में शुमार हरियाणा के बहादुरगढ़ निवासी करण राठी वर्तमान में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रह रहे हैं। उनकी लंबाई करीब 8 फीट 2 इंच बताई जा रही है। इतनी कम उम्र में इतनी हाइट होना बेहद दुर्लभ माना जाता है, जिसके चलते करण पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं।
आनुवंशिक कारणों से है लंबाई
करण हड्डियों और जोड़ों पर दबाव, थकान और हार्मोनल असंतुलन आदि की समस्याओं के समाधान के लिए करण अपनी मां के साथ पतंजलि योगपीठ में रहकर उपचार और योग मार्गदर्शन ले रहे हैं। करण की असामान्य लंबाई को आनुवंशिक कारणों से भी जोड़ा जा रहा है। उनके पिता डॉ. संजय राठी और माता श्वेता राठी दोनों की लंबाई भी सामान्य से काफी अधिक, करीब 7 फीट से ऊपर है। ऐसे में परिवार में लंबाई का यह गुण प्रमुख रूप से मौजूद है।
करण राठी अपनी असाधारण लंबाई के कारण जहां भी जाते हैं, लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहते हैं। आम लोगों से लेकर विशेषज्ञ तक उनकी हाइट को लेकर हैरानी जताते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि करण की लंबाई उन्हें खेल, खासकर बास्केटबॉल में बेहतर अवसर दे सकती है। वहीं, करण का फोकस पढ़ाई पर है और वे भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

