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पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी की जयंती पर परिचर्चा

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पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी की जयंती पर परिचर्चा


हरिद्वार, 17 मार्च (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में आर्य समाज के प्रखर विद्वान एवं महान दार्शनिक पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी की जयंती के अवसर पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का मुख्य विषय पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व रहा, जिसमें वक्ताओं ने उनके अल्पायु जीवन में किए गए महान कार्यों और उनकी विलक्षण बौद्धिक प्रतिभा पर प्रकाश डाला।

डॉ. बबलू वेदालंकार ने कहा कि पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी का जीवन शोध और सत्य की खोज का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि एक प्रखर वैज्ञानिक मस्तिष्क ने वैदिक दर्शन को आत्मसात कर उसे तार्किक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी का मानना था कि वेद केवल उपासना की पुस्तकें नहीं हैं, बल्कि वे ईश्वरीय ज्ञान और विज्ञान का अक्षय कोष हैं, जिन्हें समझने के लिए श्रद्धा के साथ-साथ प्रखर तर्कशक्ति भी आवश्यक है।

इस अवसर पर डॉ. भारत वेदालंकार ने पंडित जी के जीवन संघर्षों और महर्षि दयानन्द सरस्वती के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, किंतु महर्षि दयानन्द की शिक्षाओं ने पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी के जीवन को नई दिशा दी और उन्हें वैदिक दर्शन का प्रमुख पुरोधा बनाया।

डॉ. विपिन बालियान व डॉ आशीष कुमार ने संस्कृत भाषा और शोध के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संस्कृत के गहन अध्ययन के बिना हम अपने प्राचीन ज्ञान और गौरव को पूर्ण रूप से नहीं समझ सकते। उन्होंने कहा कि पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी का शोध कार्य आज भी आधुनिक विद्वानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस बौद्धिक विमर्श में शोध छात्र हिमांशु मिश्रा, धर्मवीर शर्मा और विकास ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला