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देवभूमि उद्यमिता योजना ने बदली कार्तिक की राह, ‘नमस्ते सारथी’ से कुमाऊं के पर्यटन को नई दिशा

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-पिथौरागढ़ के टैक्सी चालक के बेटे ने पर्यटकों की समस्या का खोजा डिजिटल समाधान, 15 बसों का नेटवर्क जुड़ा

देहरादून, 24 अगस्त (हि.स.)। पिथौरागढ़ के मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले कार्तिक पांडेय ने देवभूमि उद्यमिता योजना के मार्गदर्शन से पर्यटन क्षेत्र की एक स्थानीय समस्या को सफल स्टार्टअप में बदलने की मिसाल पेश की है। उनके पिता वर्षों से टैक्सी चलाते हैं और बचपन में उनके साथ यात्राओं के दौरान कार्तिक ने पर्यटकों को उचित दर पर विश्वसनीय टैक्सी, होटल और स्थानीय गाइड उपलब्ध कराने में आने वाली परेशानियों को करीब से देखा।

इसी अनुभव से उन्होंने इस समस्या का समाधान खोजने की दिशा में काम शुरू किया। वर्ष 2025 में महाविद्यालय में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत आयोजित उद्यमिता बूटकैंप में उन्हें अपने विचार को व्यावसायिक मॉडल में बदलने का अवसर मिला।

बूटकैंप में कार्तिक ने बिजनेस मॉडल कैनवास तैयार करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाने तथा स्टार्टअप को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने ‘नमस्ते सारथी’ नाम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जहां पर्यटक होटल, परिवहन और स्थानीय गाइड की सेवाएं एक ही स्थान पर बुक कर सकते हैं।

शुरुआत में व्यवसाय को ग्राहकों तक पहुंचाने में चुनौतियां आईं। इसके बाद कार्तिक ने देवभूमि उद्यमिता योजना के विशेषज्ञों से दोबारा मार्गदर्शन लिया। डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, ग्राहक तक पहुंच और व्यवसाय विस्तार की रणनीतियों पर मिले प्रशिक्षण ने उनके स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में मदद की।

एलएसएम पिथौरागढ़ की डॉ. रुचिता पंघरिया, जो देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी भी हैं, ने कार्तिक को लगातार मार्गदर्शन दिया। विशेषज्ञों के साथ ब्रेनस्टॉर्मिंग और नियमित मेंटरशिप से उनके व्यवसाय को नई दिशा मिली।

आज नमस्ते सारथी के साथ 15 बसों का नेटवर्क जुड़ चुका है और यह निरंतर अपने सेवा क्षेत्र का विस्तार कर रहा है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर सीखने की इच्छा और कठिन परिश्रम किसी भी विचार को सफल उद्यम में बदल सकते हैं।

सफलता के बावजूद कार्तिक ने सीखना नहीं छोड़ा। वर्ष 2026 में उन्होंने एक बार फिर देवभूमि उद्यमिता योजना के रेजिडेंशियल बूटकैंप में भाग लिया, ताकि अपने व्यवसाय को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाया जा सके। उनका मानना है कि उद्यमिता में सफलता एक बार की उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है।

कार्तिक कहते हैं कि नमस्ते सारथी लगातार बड़ा बनता रहेगा, जब तक मैं सीखता रहूंगा। कार्तिक पांडेय की यह यात्रा केवल एक स्टार्टअप की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवंत उदाहरण है कि देवभूमि उद्यमिता योजना युवाओं के विचारों को पहचानकर उन्हें व्यवहारिक ज्ञान, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और सतत मेंटरशिप के माध्यम से सफल उद्यमों में परिवर्तित कर रही है। आज जो विचार कक्षा में जन्मा था, वह एक सफल व्यवसाय बनकर उत्तराखण्ड के पर्यटन क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उद्यमिता योजना का उद्देश्य केवल नए उद्यम स्थापित करना नहीं, बल्कि युवाओं के नवाचार और स्थानीय समस्याओं के समाधान को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना है। कार्तिक द्वारा 'नमस्ते सारथी' जैसे स्टार्टअप के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता का समाधान प्रस्तुत करना इस योजना की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। विश्वास है कि युवा अपनी प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता के बल पर उत्तराखण्ड को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राज्य सरकार युवाओं के हर नवाचारी प्रयास को निरंतर प्रोत्साहन और आवश्यक सहयोग प्रदान करती रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल