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कलयुग में समय का अभाव, ईश्वर के स्मरण ही मनुष्य का उद्धार संभवः दुर्गेश

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कलयुग में समय का अभाव, ईश्वर के स्मरण ही मनुष्य का उद्धार संभवः दुर्गेश


नई टिहरी, 18 सितंबर (हि.स.)। जिला मुख्यलाय के बौराड़ी शहीद स्मारक में वीर शहीद सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में आयोजित शिव महापुराण के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की कथा का श्रवण किया।

कथा वाचक डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने शिव संहिता की कथा सुनाते हुए कलयुग में भक्ति के महत्व को समझा। कहा कि कलयुग में मनुष्य के पास समय का अभाव है। जीवन की भागदौड़ में व्यक्ति सांसारिक कार्यों में इतना उलझ जाता है कि उसे ईश्वर के स्मरण के लिए भी समय नहीं मिल पाता। ऐसे में भगवान का नाम, संतों की संगत और चिंतन मनुष्य को सही मार्ग पर ले जाने वाली सरल साधनाएं हैं।

डॉ. दुर्गेश ने कहा कि नवधा भक्ति में तीन साधन विशेष रूप से श्रेष्ठ माने गए हैं। इनमें संतों की संगत करना, भगवान का नाम जपना और निरंतर उनका चिंतन करना शामिल है। इन साधनाओं को जीवन में अपनाने से मनुष्य के भीतर सकारात्मक बदलाव आता है और वह काम, क्रोध तथा पाप कर्मों से दूर रहने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

कथा के दौरान शहीद सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को भी स्मरण किया गया। इस मौके पर आचार्य कृष्णा मिश्रा, महावीर उनियाल, गोंविद पुंडीर, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष टीकम चौहान, नित्यानंद बहुगुणा, रोशन थपलियाल, धन सिंह चौहान, अनीता थपलियाल, सोनम भंडारी मौजूद थे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी