2027 में हरिद्वार में कुंभ या अर्धकुंभ, गंगा सभा धार्मिक परंपराओं का करेगी पालन
हरिद्वार, 01 अप्रैल (हि.स.)। वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाले आयोजन को लेकर चल रही कुंभ या अर्धकुंभ की बहस के बीच गंगा सभा ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। गंगा सभा ने कहा है कि अब तक कहीं भी वर्ष 2027 के आयोजन को कुंभ नहीं बल्कि अर्धकुंभ ही लिखा है और धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई गंगा सभा की बैठक में कई पुरोहितों और पदाधिकारियों ने यह मुद्दा उठाया और वस्तुस्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इससे पहले गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष और समाज के वरिष्ठ सदस्य अशोक त्रिपाठी व रामकुमार मिश्रा ने भी अर्धकुंभ को कुंभ लिखे जाने और इस पर गंगा सभा की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे।
अशोक त्रिपाठी ने कहा कि गंगा सभा कुंभ का प्रमुख अंग है और वह प्राचीन धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार की छेड़छाड़ पर मौन नहीं रह सकती। उनका कहना था कि कुंभ कोई साधारण मेला नहीं बल्कि धार्मिक पर्व है, जो निश्चित समय और ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति में ही आयोजित होता है।
बताया जा रहा है कि इन सवालों के बाद हुई बैठक में गंगा सभा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके पंचांग में भी 2027 का आयोजन अर्धकुंभ के रूप में ही अंकित है और सभी स्नानों का उल्लेख भी अर्धकुंभ स्नान के रूप में किया गया है। सभा के पदाधिकारियों ने यह भी भरोसा दिलाया कि गंगा सभा एक पौराणिक धार्मिक संस्था है और वह परंपराओं तथा धार्मिक मान्यताओं से अलग जाकर कोई निर्णय नहीं लेगी।
गंगा सभा के इस स्पष्टीकरण के बाद अब अर्धकुंभ को कुंभ घोषित करने का विवाद सीमित रूप से कुछ अखाड़ों तक ही रह गया है। बताया जा रहा है कि कुछ अखाड़ों ने अर्धकुंभ के दौरान कुंभ की तरह पेशवाई निकालने को लेकर शासन को सहमति दी है।हालांकि, गंगा सभा के रुख से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार 2027 का आयोजन अर्धकुंभ के रूप में ही माना जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

