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गढ़वाल आयुक्त ने लैंड फ्रॉड के 125 मामलों की सुनवाई की, 45 का किया निस्तारण

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देहरादून, 02 मई (हि.स.)। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या की समीक्षा की गई।

बैठक में लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित व 105 नए मामलों सहित 125 मामलों की सुनवाई हुई। कुल 45 प्रकरणों का निस्तारण के साथ ही 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। नए मामलों में सबसे अधिक 74 मामले देहरादून जिले के हैं, जबकि हरिद्वार के 15, पौड़ी 13, टिहरी के 02 व चमोली का 01 प्रकरण भी इसमें शामिल है।

गढ़वाल आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का त्वरित व प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रकरणों में संयुक्त निरीक्षण अपेक्षित है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि लैंड फ्रॉड समिति की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि हर 15 दिनों के अंतराल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में आयोजित बैठक में कुल 125 प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें 20 लंबित और 105 नए मामले शामिल थे। इनमें से 24 प्रकरण अत्यंत गंभीर पाए गए, जिनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

इन 24 मामलों में उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग, मिथलेश सिंघल, जगदंबा रावत, अर्जुन सिंह, सामरजी देवी समेत कुल 13 शिकायतें विशेष रूप से भूमि पर तारबाड़ कर कब्जा व जमीन को खुर्द-बुर्द करने से संबंधित हैं। आयुक्त ने कहा कि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कहीं बिना जमीन के ही बिक्री, कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर अलग भूमि देना, तो कहीं 2 बीघा भूमि को 4 बीघा बताकर बेचना जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं।

आयुक्त ने ऐसे मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त भूमि धोखाधड़ी, अवैध कब्जा एवं गंभीरता वाले अन्य 11 मामलों पर भी आयुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि 24 एफआईआर योग्य मामलों के अतिरिक्त 45 अन्य प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया है। इनमें कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है। कुछ में लेन-देन की समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप से सुलझ गई और धनराशि वापस कर दी गई। कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए, जिनमें बेनामा निरस्तीकरण से संबंधित विवाद हैं और इनमें लैंड फ्रॉड नहीं पाया गया। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निस्तारण विधिवत न्यायालय के माध्यम से ही होगा।

आयुक्त ने विशेष रूप से बड़े भू-क्षेत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे लंबित प्रकरणों में 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति लाना सुनिश्चित करें। ऐसे मामलें जिनमें अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, उनमें तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल