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पहाड़ों में ईवी संचालन को नए तकनीकी उपाय विकसित करने जरूरीः डबराल

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पहाड़ों में ईवी संचालन को नए तकनीकी उपाय विकसित करने जरूरीः डबराल


नई टिहरी, 05 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्र सरकार की एटीएएल (एआईसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग) योजना के अंतर्गत टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (टीएचडीसी-आईएचईटी) भागीरथीपुरम नई टिहरी में पहाड़ी इलाकों के लिए टिकाऊ इलेक्ट्रिक वाहन विषय को लेकर छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया गया। जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से आए 30 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

सोमवार को बीपुरम में टीएचडीसी के डीजीएम आशीष डबराल और एफडीपी के समन्वयक प्रो. नितिन कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समन्वयक गुप्ता ने कार्यक्रम के उद्देश्य, इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी के वर्तमान परिदृश्य, इसके व्यापक दायरे सहित भविष्य की चुनौतियों से रूबरू कराया। डीजीएम डबराल ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान को नए तकनीकी उपाय विकसित करने जरूरी हैं। प्रतिभागियों से रेंज एंग्जायटी, टॉर्क की आवश्यकता और कठिन पर्वतीय मार्गों में ईवी के प्रदर्शन जैसी समस्याओं पर शोध व संभावित समाधान खोजने की अपील की।

उद्योग विशेषज्ञ एलेस्पा एचईवी प्राइवेट लिमिटेड के प्रथमेश चौधरी ने हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम तकनीकी विकास से अवगत कराया। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयुक्तता, उनकी कार्यक्षमता सहित भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी। डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. सुलक्षणा शर्मा ने प्रतिभागियों को एफडीपी के माध्यम से प्राप्त होने वाले ज्ञान व विशेषज्ञ मार्गदर्शन का अधिकतम लाभ उठाने को कहा। एमएनआईटी जयपुर के विशेषज्ञ डॉ. नितिन गुप्ता, सह समन्वयक हिमांशु नौटियाल ने इलेक्ट्रिक वाहनों का परिचय देते हुए उनके विद्युत वितरण नेटवर्क पर प्रभाव, इस क्षेत्र में संभावित शोध विषयों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ईवी के बढ़ते प्रसार के साथ वितरण प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभावों व इन चुनौतियों के समाधान के लिए आवश्यक अनुसंधान क्षेत्रों पर चर्चा की।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी