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भारतीय शिक्षा बोर्ड के राष्ट्रीय संवाद सत्र में तैयार हुआ शिक्षा सुधार का रोडमैप

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भारतीय शिक्षा बोर्ड के राष्ट्रीय संवाद सत्र में तैयार हुआ शिक्षा सुधार का रोडमैप


हरिद्वार, 06 जून (हि.स.)। देश की शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के समन्वय के माध्यम से व्यापक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संवादात्मक बैठक का पतंजलि फेज-2 स्थित पीआरआई ऑडिटोरियम में समापन हो गया।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के 12 राज्यों से आए शिक्षाविदों, विद्यालय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लेकर भारतीय शिक्षा के भविष्य को लेकर व्यापक मंथन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड देश की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक और दूरगामी परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बीएसबी केवल एक शैक्षणिक बोर्ड नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को एकीकृत करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक आंदोलन है।

उन्होंने कहा कि भारत को उसकी जड़ों से जोड़ने वाली शिक्षा व्यवस्था आज समय की आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय शिक्षा बोर्ड विद्यार्थियों के समग्र विकास, राष्ट्र निर्माण और भारत-केंद्रित शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

तीन दिवसीय संवाद सत्र का उद्देश्य संबद्ध विद्यालयों से जुड़े शैक्षणिक एवं संस्थागत विषयों पर सार्थक चर्चा, पारदर्शिता और सहयोगात्मक समाधान के लिए साझा मंच उपलब्ध कराना था। इस दौरान पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों, मूल्यांकन एवं आकलन प्रणाली, संबद्धता संबंधी प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा ओपन हाउस सत्रों के माध्यम से विद्यालयों की जिज्ञासाओं और सुझावों पर चर्चा की गई।

इस अवसर पर प्रशिक्षण एवं गुरुकुल शिक्षा सलाहकार वंदना पांडे, शैक्षणिक निदेशक लक्ष्मी प्रमाणिक, परीक्षा नियंत्रक राजबीर सिंह, संबद्धता सलाहकार एवं प्रशिक्षण निदेशक विवेक सहित बोर्ड के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, ओडिशा और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षाविदों एवं विद्यालय प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला