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शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री पर्व पर हरिद्वार में उमड़ा जनसैलाब

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शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री पर्व पर हरिद्वार में उमड़ा जनसैलाब


शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री पर्व पर हरिद्वार में उमड़ा जनसैलाब


गंगा घाटों पर दिनभर रही आस्था की अविरल धारा

हरिद्वार, 16 मई (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार में शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री व्रत का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। एक ओर जहां लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया, वहीं सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। पर्व के अवसर पर हरिद्वार के घाटों, मंदिरों और प्रमुख मार्गों पर सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

शनिश्चरी अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। अलसुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही हरकी पैड़ी, मालवीय घाट, कुशावर्त घाट, सुभाष घाट, भीमगौड़ा तथा अन्य गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे और बम-बम भोले के जयघोष के साथ गंगा में स्नान कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मान्यता है कि शनिश्चरी अमावस्या के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त किए गए कर्म विशेष फलदायी होते हैं। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान किया। नारायणी शिला और कुशावर्त घाट पर पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने पिंडदान, तर्पण और नारायण बलि जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। पंडितों और पुरोहितों के मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

वहीं वट सावित्री व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने सुबह स्नान के बाद सोलह श्रृंगार कर व्रत रखा और वट वृक्ष के नीचे विधिवत पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत बांधकर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से वट सावित्री कथा का श्रवण भी किया। पूजा के पश्चात महिलाओं ने घर की बुजुर्ग महिलाओं को बायना देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

पर्व के दौरान शहर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। हरकी पैड़ी क्षेत्र, बाजारों और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी चहल-पहल रही। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार स्नान पर्व और व्रत के कारण पूजा सामग्री, प्रसाद, फूल-माला और धार्मिक वस्तुओं की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई।

इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और आपदा राहत टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया था। नगर निगम की टीमों ने घाटों और आसपास के क्षेत्रों में लगातार सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखी। धार्मिक संगठनों और संत-महात्माओं ने भी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से सनातन परंपराओं और संस्कृति को बनाए रखने का आह्वान किया। पूरे दिन हरिद्वार में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला