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बैसाखी पर्व पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब, गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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बैसाखी पर्व पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब, गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


हरिद्वार, 14 अप्रैल (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार में बैसाखी पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पवित्र अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालु हर की पौड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। तडक़े सुबह से ही घाटों पर गंगा मैया की जय के जयकारे गूंजने लगे और श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ पवित्र गंगा में डुबकी लगाई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बैसाखी के दिन गंगा स्नान, सूर्य पूजन और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से ऋतु परिवर्तन का संकेत मिलता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।

पर्व के मद्देनजऱ प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पूरे मेला क्षेत्र को 10 जोन और 33 सेक्टर में विभाजित किया गया। पुलिस बल के साथ-साथ बम निरोधक दस्ता और जल पुलिस की तैनाती की गई है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद हवन-पूजन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। कई स्थानों पर देव डोलियों को भी गंगा स्नान कराया गया, जिससे धार्मिक वातावरण और भी श्रद्धामय हो गया।

बैसाखी पर्व के कारण हरिद्वार के बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। श्रद्धालुओं की भीड़ से शहर जीवंत नजर आया और विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला दिनभर जारी रहा। स्नान पर्व पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था सुचारू करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। वैशाखी पर तीर्थनगरी के आश्रम-अखाड़ों में भी कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। अल सुबह से आरम्भ हुआ स्नान का सिलसिला अनवरत जारी रहा।

बैसाखी के पावन अवसर पर हरिद्वार में आस्था, परंपरा और सुरक्षा का सुंदर संगम देखने को मिला, जहां श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला