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बदरीनाथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम पर विवाद, सतपाल महाराज बोले- प्रतिबंध के दावे तथ्यहीन

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बदरीनाथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम पर विवाद, सतपाल महाराज बोले- प्रतिबंध के दावे तथ्यहीन


देहरादून, 28 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम परिसर के समीप आयोजित एक उत्सव में संगीत प्रस्तुति का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर चल रही चर्चाओं पर पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बदरीनाथ धाम के पास संगीत, नृत्य अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध होने संबंधी दावों को तथ्यहीन बताया है।

सतपाल महाराज ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर भारतीय सेना का बैंड धार्मिक धुनों और मंगल संगीत की प्रस्तुति करता है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि उर्वशी पीठ भी है और यहां संगीत के माध्यम से ईश्वर की आराधना एवं स्तुति की परंपरा रही है।

उन्होंने कहा कि सीमांत गांव माणा में भी विवाह सहित विभिन्न सामाजिक अवसरों पर पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ये देवभूमि की सांस्कृतिक एवं सनातन परंपराओं का हिस्सा हैं।

महाराज ने बदरीनाथ की पूजा पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर के गर्भगृह के भीतर शंख बजाने की परंपरा नहीं है और वहां शंखनाद वर्जित है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। हालांकि मंदिर परिसर के बाहर शंख बजाने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे प्रतिबंध के बजाय बदरीनाथ की विशिष्ट पूजा पद्धति के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी बदरीनाथ धाम में विभिन्न अवसरों पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में धाम में इस प्रकार के कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध होने की बात निराधार है।

मंत्री ने प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं से सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी अपुष्ट सूचना अथवा अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार केदारनाथ सहित चारों धामों की पवित्रता, परंपरा और मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय