परंपरागत माटी कला को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने पर जोर
पौड़ी गढ़वाल, 09 सितंबर (हि.स.)। कुम्हारों और माटी कला से जुड़े कारीगरों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से जिला उद्योग केंद्र कोटद्वार में “परम्परा से प्रगति की ओर” थीम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कारीगरों को सरकारी योजनाओं, ऋण सुविधाओं, प्रशिक्षण, स्वरोजगार, बाजार एवं प्रचार-प्रसार के साथ ही आधुनिक तकनीक और नवाचार की जानकारी दी।
माटी कला बोर्ड की उपाध्यक्ष अनुराधा ध्यानी वालिया ने कारीगरों से पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि माटी कला उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़कर कारीगर अपनी कला को नई पहचान देने के साथ आय में भी वृद्धि कर सकते हैं।
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सोमनाथ गर्ग ने कहा कि माटी कला से जुड़े कारीगरों को विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाना, उनकी कला को बाजार उपलब्ध कराना और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना विभाग की प्राथमिकता है। कार्यक्रम में कारीगरों को पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ आधुनिक डिजाइन, तकनीकी कौशल और विपणन माध्यम अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों और माटी कला से जुड़े कारीगरों ने प्रतिभाग किया।
हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह

