मनसा देवी भूस्खलन के प्रबंधन का केंद्र की टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण
हरिद्वार, 04 फ़रवरी (हि.स.)। भूस्खलन जोखिम प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, विश्व बैंक तथा नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टिट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत, नेपाल एवं भूटान से आए प्रतिभागियों ने सहभागिता की। टीम के सदस्यों द्वारा मनसा देवी पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन के उचित प्रबंधन, ट्रीटमेंट के लिए निरीक्षण किया गया।
भूस्खलन जोखिम पर यह एक सप्ताह-व्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम 02 फरवरी को देहरादून में प्रारंभ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को भूस्खलन प्रक्रियाओं, जोखिम कारकों, मूल्यांकन पद्धतियों तथा प्रबंधन रणनीतियों की समग्र एवं व्यवहारिक समझ विकसित हो सके।
प्रशिक्षण के क्रम में, 04 फरवरी को हरिद्वार स्थित मानसा देवी पहाड़ियों के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में एक प्रशिक्षण भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण उस स्थल पर आयोजित किया गया जहां यूएलएमएमसी द्वारा भू-डिजाइन, भू-अन्वेषण, ड्रिलिंग तथा भू-भौतिकीय जांच जैसे वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। इस अवसर पर प्रतिभागियों को यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार के नेतृत्व में स्थल की वास्तविक परिस्थितियों तथा चल रही जांच एवं विश्लेषण प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाओं में यह स्पष्ट किया गया कि इस प्रकार के क्षेत्रीय अवलोकन किस प्रकार प्रभावी दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों की योजना एवं डिजाइन में सहायक होते हैं। नेपाल एवं भूटान से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने भूस्खलन जोखिम प्रबंधन में बहु-एजेंसी एवं अंतर-देशीय सहयोग के महत्व को और अधिक रेखांकित किया। चर्चाओं के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि भूस्खलन शमन उपायों की योजना, डिजाइन एवं क्रियान्वयन के लिए समन्वित, एकीकृत तथा बहु-विभागीय दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।
इस दौरान वरिष्ठ भूवैज्ञानिक रुचिका टंडन, भूवैज्ञानिक डॉ रघुबीर, उप निर्देशक राजाजी पार्क अजय नेगी लिंगवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, उप मुख्य नगर अधिकारी रिषभ उनियाल,अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक कुमार, संबंधित अधिकारी सहित विभिन्न देशों से आए भूवैज्ञानिक मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

