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नाबालिग से दुष्कर्म व अपहरण के आरोपित को संदेह का लाभ, न्यायालय ने किया दोषमुक्त

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नाबालिग से दुष्कर्म व अपहरण के आरोपित को संदेह का लाभ, न्यायालय ने किया दोषमुक्त


नैनीताल, 05 सितंबर (हि.स.)। नैनीताल जनपद के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो हल्द्वानी की विशेष न्यायाधीश सविता चमोली की अदालत ने काठगोदाम थाने में दो वर्ष पूर्व दर्ज अपहरण और लैंगिक अपराध के मामले में आरोपित चंदन सिंह सम्मल को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

अभियोजन के अनुसार एक फरवरी 2024 को काठगोदाम क्षेत्र निवासी 16 वर्षीय किशोरी घर से बिना बताए चली गई थी। पिता की तहरीर पर अभियोग दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान किशोरी के बयानों के आधार पर चंदन सिंह सम्मल का नाम सामने आया। आरोप था कि वह किशोरी को जबरन अपने साथ बेलपड़ाव से छोई ले गया और वहां एक झोपड़ी में रखकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।

विवेचना के बाद आरोपित के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376(2)(एन) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया।

मामले में अभियोजन ने कुल 10 गवाह पेश किए, जिनमें किशोरी, उसके पिता, चिकित्सक, विद्यालय के प्रधानाचार्य और विवेचक शामिल थे। न्यायालय ने किशोरी के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए। अदालत के अनुसार न्यायालय में उसने आरोप लगाया कि आरोपित धमकी देकर उसे अपने साथ ले गया, जबकि चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान दर्ज उसके कथन में स्वयं घर से जाने की बात सामने आई।

बरामदगी को लेकर भी पुलिस अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास पाया गया। एक विवेचक ने बताया कि किशोरी स्वयं परिजनों के साथ थाने आई थी, जबकि दूसरे विवेचक ने उसकी बरामदगी पुलिसकर्मी द्वारा किए जाने की बात कही।

न्यायालय ने यह भी पाया कि कथित घटना स्थल छोई की झोपड़ी के संबंध में पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य एकत्र नहीं किए। झोपड़ी के आसपास रहने वाले लोगों को गवाह नहीं बनाया गया। चिकित्सकीय रिपोर्ट में भी जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। रिपोर्ट में हाइमन फटे होने का उल्लेख था, लेकिन चिकित्सक ने माना कि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं करती थी। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष किशोरी को उसकी संरक्षकता से बिना अनुमति ले जाने तथा उसके साथ लैंगिक अपराध किए जाने के आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

इस प्रकार न्यायालय ने चंदन सिंह सम्मल को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। आरोपित पहले से जमानत पर था, इसलिए उसके जमानत बंधपत्र और जमानतदारों को दायित्व से मुक्त करने के आदेश दिए गए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी