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नाटक के माध्यम से उठाया अंकिता हत्याकांड के वीआईपी का मुददा

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पौड़ी गढ़वाल, 18 जनवरी (हि.स.)।नवांकुर नाट्य समूह द्वारा आयोजित 23 दिवसीय शीतकालीन नाट्य कार्यशाला में तैयार किए गए नाटकों का स्थानीय प्रेक्षागृह में शानदार मंचन किया गया। कार्यशाला का संचालन रंगकर्मी मनोज दुर्बी एवं यमुना राम के निर्देशन में किया गया।

रविवार को प्रेक्षागृह में नाटक जश्ने बचपन का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष किया गया। नाटक में एक विद्यालय का दृश्य प्रस्तुत किया गया है, जहां हिंदी के अध्यापक बच्चों को जयशंकर प्रसाद की रचना कामायनी पढ़ाते हुए बताते हैं कि मनुष्य की उत्पत्ति मनु और माता श्रद्धा से हुई है। वहीं दूसरी ओर विज्ञान के अध्यापक डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत के माध्यम से मनुष्य की उत्पत्ति बंदरों से होना बताते हैं।

इंटरवल के दौरान बच्चे इन दोनों विचारधाराओं पर विमर्श करते हैं, जिससे उनके बीच दो धड़े बन जाते हैं। अंततः विज्ञान शिक्षक बच्चों को तर्क और वैज्ञानिक सोच के महत्व को समझाते हैं। इस नाटक का निर्देशन पारस रावत ने किया। इसके बाद दूसरा नाटक ये कैसा दौर मंचित किया गया। इस नाटक में पौड़ी, उत्तराखंड और देश की समसामयिक समस्याओं को प्रभावी ढंग से उजागर किया गया।

नाटक में कुत्तों और बंदरों के आतंक, गुलदार के भय से परेशान शहरवासियों की चर्चा दिखाई गई, जहां लोग जनसहभागिता से समस्याओं के समाधान का संकल्प लेते हैं। नाटक में लड़कियों से छेड़छाड़ करने वाले लड़कों को लड़कियों द्वारा सबक सिखाने का सशक्त संदेश दिया गया। वहीं, एक रिसॉर्ट में इंटरव्यू देने आई युवतियों से मालिक द्वारा एक्स्ट्रा सर्विस के लिए दबाव बनाने का विरोध भी दर्शाया गया।

इसके अलावा, एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को गुंडों द्वारा घेरकर जबरन वंदे मातरम कहने के लिए दबाव बनाने और कालिख पोतने के प्रयास का दृश्य दिखाया गया, जिसमें छात्र अपने प्रोफेसर की रक्षा करते हैं। इस नाटक का निर्देशन शंकर राणा और अरमान ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह