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पौड़ी में रामलीला का 126वां मंचन शुरू, राम-लक्ष्मण सहित चारों भाइयों का जन्म प्रसंग मंचित

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पौड़ी में रामलीला का 126वां मंचन शुरू, राम-लक्ष्मण सहित चारों भाइयों का जन्म प्रसंग मंचित


पौड़ी गढ़वाल, 12 अक्टूबर (हि.स.)। श्री रामलीला मंचन एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित पौड़ी की ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ हो गया।

पूर्व विधायक एवं पूर्व नगर पालिका परिषद अध्यक्ष यशपाल बेनाम, रामलीला समिति के संरक्षक आशुतोष नेगी और जिला स्काउट गाइड सचिव केसर सिंह असवाल ने संयुक्त रूप से रामलीला का उद्घाटन किया। इस दौरान भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने के साथ ही धार्मिक और पौराणिक परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया गया।

मुख्य अतिथि यशपाल बेनाम ने कहा कि धार्मिक और पौराणिक महत्व के आयोजनों को संरक्षित रखने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पौड़ी की रामलीला का 126वां मंचन इस बात का प्रमाण है कि यहां की सांस्कृतिक परंपराएं निरंतर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धर्म और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

समिति के उपाध्यक्ष मनोज रावत अंजुल ने जनता से रामलीला के आयोजन में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समिति को मिलने वाला सहयोग कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के साथ ही पौड़ी की ऐतिहासिक रामलीला को मजबूती प्रदान करता है।

रामलीला के पहले दिन की शुरुआत ‘गाइए गणपति जग वंदन’ की स्तुति से हुई। इसके बाद कैलाश पर्वत पर शिव-पार्वती संवाद के अंतर्गत ‘जब नीच निशाचर पाप करे’ प्रसंग का मंचन किया गया। इसके बाद रावण दरबार में शुक्राचार्य द्वारा राक्षसों को ऋषि-मुनियों को सताने और उनसे कर वसूलने के लिए प्रेरित करने के प्रसंग ने कथा को आगे बढ़ाया।

अयोध्या में राजा दशरथ की सभा, दशरथ-सुमंत संवाद, पुत्रेष्टि यज्ञ और भगवान राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के जन्म की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद जनक दरबार में प्रजाजनों के आग्रह पर राजा जनक द्वारा हल जोतने और इसी दौरान माता सीता के प्राकट्य का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

दशरथ-सुमंत संवाद में राजा दशरथ की व्याकुलता को दर्शाता गायन ‘मेरे पुत्र नाहीं, पुत्र नाहीं, पुत्र नाहीं जी’ विशेष रूप से मार्मिक रहा। वहीं, राजा जनक की भूमिका में गोपाल नेगी के गायन ‘तुम कौन कहां से आये’ और रावण की भूमिका में आशुतोष नैथानी के गायन ‘मैं रावण हूं, दशानन हूं’ को दर्शकों ने खूब सराहा। दशरथ के पात्र के लिए दिनेश रावत ‘टिन्नू’ ने पार्श्व गायन किया।

रामलीला में महादेव की भूमिका सुनील रावत, पार्वती की प्रीति, दशरथ की जगत किशोर बर्थवाल, सुमंत की इंद्र मोहन चमोली, रावण की आशुतोष नैथानी, जनक की गोपाल नेगी, सुनैना की अदिति नेगी, शुक्राचार्य राहुल, श्रृंगी ऋषि की पारस, दूत की गौतम, कैकेयी की सुहानी नौटियाल, कौशल्या की आरती बहुगुणा, सुमित्रा की दीपिका चौहान और वशिष्ठ की भूमिका पारस ने निभाई।

भाव नृत्य में अदिति रावत, वैभवी चमोली, वंशिका, आयुषी, सोनाली, अदिति रुडोला, निहारिका, वैभवी ममगाईं और स्वयंका रावत ने प्रस्तुतियां दीं। नृत्य निर्देशन पावनी बहुगुणा तथा सह-नृत्य निर्देशन अदिति रावत ने किया।

संगीत संयोजन की जिम्मेदारी शिव दिनेश ने संभाली। ढोलक और तबले पर प्रमेन्द्र नेगी, राहुल नेगी व पवन पुरोहित, हारमोनियम पर आदर्श सुंदरियाल, रिदम गिटार पर शिवम पंत और बास गिटार पर अजय रतूड़ी ने संगत दी। साइड रिदम और विशेष प्रभावों में नवांश बहुगुणा का योगदान रहा। मंच निर्देशन सुबोध रावत तथा सह-निर्देशन हिमांशु चौहान ने किया। मंच संचालन वीरेंद्र खांकरियाल कर रहे हैं।

बारिश के कारण रामलीला का मंचन निर्धारित समय से देर से शुरू हुआ। इसके चलते पहले दिन दर्शकों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। इस अवसर पर समिति के सचिव राम सिंह रावत, सुशील बहुगुणा, अद्वैत बहुगुणा, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह रावत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह