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124वें नंदा देवी महोत्सव का भव्य शोभायात्रा और डोला विसर्जन के साथ समापन

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124वें नंदा देवी महोत्सव का भव्य शोभायात्रा और डोला विसर्जन के साथ समापन


नैनीताल, 23 सितंबर (हि.स.)। आठ दिनों तक चले 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव का बुधवार को मां नंदा-सुनंदा की भव्य शोभायात्रा और डोला विसर्जन के साथ भावपूर्ण समापन हुआ। माता को मायके से विदा करने के लिए नगर और दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालु शोभायात्रा में शामिल हुए। ‘जय देवी जय नंदे, जयति हिमाद्रि शैल सुते’ और ‘माता नंदा-सुनंदा की जय’ के जयकारों से नगर गूंजता रहा।

श्रद्धालुओं ने डोले पर पुष्प और अक्षतों की वर्षा कर मां को विदाई दी। महिलाओं और युवतियों ने झोड़ा और नृत्य कर परंपरा को आगे बढ़ाया तथा श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से डोले को कंधा दिया। शारदा संघ के पास से गुजरते समय हल्की बूंदाबांदी भी हुई, जिसे श्रद्धालुओं ने मां की विदाई के भावुक अवसर से जोड़कर दिव्य अनुभव माना।

दोपहर 12 बजे मां नंदा-सुनंदा की शोभायात्रा नयना देवी मंदिर परिसर से नगर भ्रमण के लिए निकली। नयना देवी मंदिर के बाहर, मालरोड, तल्लीताल लेक ब्रिज चुंगी सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने डोले पर पुष्प और अक्षत अर्पित किए। मार्ग में श्रद्धालुओं को पानी, शीतल पेय और प्रसाद वितरित किया गया। इस वर्ष पहली बार सोर घाटी का लखिया भूत अपने दल के साथ शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र रहा।

आयोजक संस्था के आमंत्रण पर अखाड़े, बैंड और छोलिया दल भी शामिल हुए। शोभायात्रा में आगे सफेद और पीछे लाल ध्वज रहे तथा ड्रोन से सीधा प्रसारण किया गया। आयोजक संस्था के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बावड़ी, देवेंद्र लाल साह, डॉ मनोज बिष्ट, गिरीश जोशी, कैलाश जोशी, डॉ ललित तिवारी, पालिकाध्यक्ष डॉ सरस्वती खेतवाल और तेज सिंह नेगी सहित अनेक लोग डोले में शामिल रहे।

पाषाण देवी मंदिर के समीप मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का नैनी झील में विसर्जन किया गया। इस दौरान अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की प्रार्थना के साथ श्रद्धालुओं की आंखें नम नजर आईं। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की ओर से लोअर मालरोड खोलने की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण इस वर्ष डोला पहली बार मुख्य मालरोड से निकला। नगर पालिका की ओर से फड़ लगाए जाने के कारण लगातार दूसरी बार डोला नगर पालिका मार्ग से नहीं निकल सका। उधर, डीएसए मैदान में लगे मेले में भी भारी भीड़ रही। दुकानों पर खरीदारी और झूलों के लिए श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार करना पड़ा। मेले में भीड़ बढ़ने से दुकानदारों में उत्साह रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी