home page

शिक्षा का उद्देश्य मानवीय संबंध केंद्रित सौहार्दपूर्ण और समावेशी सोच का विकास करना: प्रो. चारण

 | 
शिक्षा का उद्देश्य मानवीय संबंध केंद्रित सौहार्दपूर्ण और समावेशी सोच का विकास करना: प्रो. चारण


हरिद्वार, 01 अप्रैल (हि.स.)। वर्तमान समय में सुविधा-केंद्रित जीवन के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा आचरण में सौहार्द सुनिश्चित करने की क्षमता रखती है। मनुष्य को संवेदनशील और समावेशी बनाना मूल्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। यह विचार एआईसीटीई के अंतर्गत राष्ट्रीय सार्वभौमिक मानवीय मूल्य समिति के अध्यक्ष प्रो. एच.डी. चारण ने व्यक्त किए।

वे गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सभागार में आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में बोल रहे थे। “एनईपी-2020 की आकांक्षाओं को समग्र मूल्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से पूरा करना” विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका लक्ष्य मानवीय संबंधों की समझ विकसित करना भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मूल्य-आधारित शिक्षा के प्रयोग से विद्यार्थियों में विवेकपूर्ण और समावेशी समझ का विकास संभव है। मूल्य, समझ और प्रकृति के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध ही जीवन में वास्तविक प्रसन्नता का मार्ग प्रशस्त करते हैं और यही जीवन का अंतिम लक्ष्य है।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि आचरण की शुचिता वैदिक जीवन का आधार है। क्षुद्र मानवीय कामनाओं से ऊपर उठकर ही जीवन के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैदिक जीवन शैली मनुष्य को उत्कृष्ट बनने की प्रेरणा देती है।

कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द ने महान उद्देश्यों को लेकर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। उनका लक्ष्य दासता की मानसिकता से समाज को मुक्त करना और वैदिक शिक्षा दर्शन को स्थापित करना था।

कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. हिमांशु पंडित ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन वित्ताधिकारी प्रो. वी.के. सिंह ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला